अवधी खबर संवाददाता
अंबेडकरनगर।
जनपद अम्बेडकर नगर में खनन विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। विभागीय भ्रष्टाचार उजागर करने वाले एक पत्रकार को जिला खनन अधिकारी द्वारा सीधे धमकाए जाने का मामला सामने आया है। अधिकारी ने डीएम के नाम पर पत्रकार को मिलने के लिए बुलाने की कोशिश की, लेकिन डीएम का संपर्क नंबर बंद मिला और व्यक्तिगत नंबर पर भी कोई जवाब नहीं मिला।
पूरा मामला IGRS पोर्टल पर दर्ज एक शिकायत से जुड़ा है,
जहां खनन विभाग के अधिकारी ने शिकायत का निस्तारण बिना किसी दस्तावेज साक्ष्य के केवल मौखिक बयान के आधार पर कर दिया और साक्ष्य के लिए RTI लगाने की सलाह देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
शिकायतकर्ता द्वारा IGRS पर असंतुष्टि दर्ज कराई गई,
जिससे नाराज होकर खनन अधिकारी ने पत्रकार को फोन कर धमकी दी कि “अगर मिलने नहीं आओगे तो तुम्हारी शिकायत को फर्जी बता दूंगा।” इतना ही नहीं, अधिकारी ने डीएम साहब के बुलाने का झूठा हवाला भी दिया। प्रश्न यह है कि जब पोर्टल पर साक्ष्य अपलोड करने का विकल्प उपलब्ध है, तो अधिकारी द्वारा उन्हें अनदेखा कर केवल मौखिक रिपोर्ट कैसे लगा दी गई? क्या जन सूचना अधिकार कानून की आड़ लेकर अपनी जिम्मेदारी से भागना सरकारी आदेशों का उल्लंघन नहीं?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि:
IGRS पर दस्तावेज़ अपलोड का विकल्प होते हुए भी अधिकारियों ने इनकार किया। शिकायत के असंतोषजनक निस्तारण पर जब असंतुष्टि फीडबैक दिया गया तो धमकाया गया। डीएम के नाम का दुरुपयोग कर मिलने का दबाव बनाया गया।
अधिकारी द्वारा पत्रकार की स्वतंत्रता और जनहित में उठाई गई आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
क्या कहता है शासन का पारदर्शिता और जनसुनवाई तंत्र?
शासन द्वारा भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी प्रणाली के दावे इस घटनाक्रम से कटघरे में आ गए हैं। यदि ऐसे अधिकारियों पर समय रहते कार्रवाई न हुई तो जनसुनवाई पोर्टल की विश्वसनीयता और शासन पर जनता का विश्वास दोनों डगमगा जाएंगे।
जनता और पत्रकारों की मांग:
प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और जिलाधिकारी के नाम का दुरुपयोग करने का जवाब तलब किया जाए। वही जब इस संबंध में खनन इंस्पेक्टर से बात करने का प्रयास किया गया तो उनके द्वारा फोन नहीं रिसीव किया गया।





