अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। महरुआ थाना क्षेत्र में अधिवक्ता प्रभात मिश्रा पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद जहां पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, वहीं इस पूरे घटनाक्रम का मास्टरमाइंड अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
जानकारी के अनुसार, घटना के बाद साथी अधिवक्ता पंकज पांडेय की तहरीर पर पुलिस ने 11 नामजद समेत करीब आधा दर्जन अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। बावजूद इसके, अब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
सबसे अहम बात यह है कि घटना में प्रयुक्त वाहन और मोबाइल फोन जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य भी पुलिस अब तक बरामद नहीं कर पाई है, जिससे जांच की दिशा और रफ्तार दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि जो व्यक्ति दूसरों को न्याय दिलाने के लिए लड़ता है, आज वही अधिवक्ता खुद न्याय के लिए भटक रहा है। मामले में देरी से अधिवक्ताओं और आमजन में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है।
मामले पर थाना महरुआ प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो पाई। वहीं पुलिस अधीक्षक से भी सीधा संपर्क नहीं हो सका। पीआरओ के माध्यम से जानकारी दी गई कि मामले की जांच के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं और जल्द ही शेष आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है।
हालांकि, जिम्मेदार अधिकारियों से सीधे संवाद न हो पाना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद पारदर्शिता की कमी महसूस की जा रही है।फिलहाल, सबकी निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं क्या पुलिस इस मामले के मास्टरमाइंड तक पहुंचेगी या यह मामला भी केवल दावों तक सीमित रह जाएगा।




