अनुबंध में तय समय के दो माह बाद भी तालाब की खुदाई नहीं हो पाई पूरी
जिला पंचायत निधि से हो रहा है तालाब की खुदाई
अवधी खबर संवाददाता
सुल्तानपुर। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भ्रष्टाचार रोकना इतना आसान नहीं है लाख दावे कर ले फिर भी उनके जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अनुबंध में तय समय के दो माह बाद भी तालाब की खुदाई पूरी नहीं हो पाई है। पूरा मामला जनपद सुल्तानपुर के जिला पंचायत निधि से बल्दीराय तहसील अंतर्गत सैनी ग्राम सभा में हो रहे तालाब की खुदाई से संबंधित है।
शुरू से ही भ्रष्टाचार, मिट्टी बेच राजस्व को पहुंचाया भारी नुकसान
पहले तो तालाब की खुदाई के दौरान सरकारी राजस्व को चूना लगाते हुए तालाब की मिट्टी आसपास के क्षेत्र में मोटी रकम में बेची जा रही थी। जिसकी कई बार खबर प्रकाशित हुई लेकिन जिम्मेदार मौन धारण कर लिए थे। जानकारी लेने पर बताया जाता था की मिट्टी नहीं बेची जा रही है। मीडिया के जीरो ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान एक स्टिंग ऑपरेशन में डंफर और ट्राली से मिट्टी बेचने का मामला उजागर हुआ।उसके बाद अधिकारी हरकत में आए और तब जाकर बेची जा रही मिट्टी पर रोक लगा पाई।
मीडिया ने जब और अधिक गहराई से जांच पड़ताल करना शुरू किया तो चौंकाने वाला मामला निकलकर सामने आया कि जिस फार्म के द्वारा तालाब की खुदाई कराई जा रही है उस फर्म को 26 जनवरी 2025 को ही कार्य पूरा कर देना चाहिए था लेकिन तय समय से भी दो महीने का समय बीत गया। फिर भी अभी तक कार्य नहीं पूरा हो पाया है।
मिली जानकारी के अनुसार अर्थ इंफ्रा. प्रा. लि. लखनऊ को 27 नवंबर 2024 को टेंडर तालाब खुदाई का पास हुआ था। एक सप्ताह के अंदर कार्य को प्रारंभ करते हुए 26 जनवरी 2025 को कार्य पूरा कर देना था।
टेंडर के अनुबंध पत्र में साफ शब्दों में ठेकेदार के द्वारा शपथ पत्र दिया गया है कि एक सप्ताह के अंदर कार्य न शुरू कराए जाने पर टेंडर को निरस्त कर दिया जाएगा साथ ही उसमें यह भी लिखा गया है कि तय समय पर भी कार्य न पूरा होने पर टेंडर निरस्त कर दिया जाएगा। साथ ही जमानत जब्त कर लेने का साफ उल्लेख है लेकिन ऐसा आज तक कुछ भी नहीं हो सका। सारा कार्य भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों कर्मचारियों की मिलीभत से किया जा रहा है।
वहीं ग्रामीणों से जानकारी हासिल करने पर यह भी जानकारी हुई कि जिस गाटा संख्या में तालाब की खुदाई हो रही है उसमें काफी समय से पानी भी नहीं था सूखा पड़ा हुआ था। इतना देरी से कार्य शुरू किया जाना किसी के गले के नीचे नहीं उतर रहा है कि जब तालाब सूखा पड़ा था तो अब तक तालाब की खुदाई क्यों नहीं की गई। ग्रामीणों के मुताबिक इसमें जिम्मेदार अधिकारी की मिली भगत से सारा खेल चल रहा है ग्रामीणों ने इस तरह से किये जा रहे भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग की है।





