मृत पिता की पेंशन निकालते रहे बेटे, 11 माह में लाखों की ठगी का खुलासा

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सरकारी पेंशन प्रणाली में गड़बड़ी उजागर, जांच रिपोर्ट में खुली जालसाजी की पोल

अवधी खबर संवाददाता

अंबेडकरनगर।
जनपद अंबेडकरनगर में सरकारी पेंशन व्यवस्था की लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। ग्राम सैदापुर निवासी स्वर्गीय मेवालाल पुत्र इंदरराम की मृत्यु के बावजूद उनके पुत्रों ने 11 माह तक पिता की जीवित पेंशन निकालकर लाखों रुपये की हेराफेरी की। यह मामला अब जांच के घेरे में आ गया है। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पेंशनर मेवालाल का निधन 8 दिसंबर 2023 को हो गया था। बावजूद इसके, उनके पुत्र शशि प्रकाश एवं ओमप्रकाश ने कोषागार को मृत्यु की सूचना दिए बिना जनवरी 2024 से नवंबर 2024 तक नियमित रूप से पेंशन राशि निकाल ली।

यह खुलासा तब हुआ जब ग्राम सैदापुर निवासी कमला प्रसाद पुत्र स्व. रामकुमार ने इस संबंध में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए पूरे प्रकरण की जांच की मांग की।
शिकायत के बाद हुई तहसील स्तरीय जांच में ग्रामवासियों के बयान और दस्तावेज सामने आने पर मामला और स्पष्ट हो गया।
तहसीलदार अकबरपुर की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि पेंशनर मेवालाल की मृत्यु 08 दिसंबर 2023 को हुई थी, जबकि ग्राम पंचायत अधिकारी सैदापुर द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण-पत्र में मृत्यु तिथि 08 मई 2024 दर्शाई गई है। यानी, ग्राम पंचायत स्तर पर प्रमाण-पत्र में हेरफेर कर पांच माह बाद की मृत्यु तिथि दर्ज कर दी गई, जिससे मृतक के पुत्रों को पेंशन राशि निकालने का अवसर मिलता रहा। इस बीच राजस्व परिषद, लखनऊ के न्यायिक आदेश में भी यह तथ्य दर्ज है कि निगरानीकर्ता मेवालाल की मृत्यु हो चुकी है। इसके बावजूद पेंशन भुगतान होता रहा, जिससे सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
कोषागार अंबेडकरनगर ने 15 अक्टूबर 2025 को तहसीलदार अकबरपुर को पत्र भेजकर जीवित प्रमाण-पत्र न मिलने पर पेंशन रोकने एवं मृत्यु की जांच कराने के निर्देश दिए थे।
परंतु, जांच कार्यवाही में विलंब होने के कारण यह मामला लापरवाही का रूप ले बैठा।

वहीं पेंशन निदेशालय लखनऊ ने भी 25 सितंबर 2025 को पत्र जारी कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए थे, परन्तु शिकायतकर्ता के अनुसार “अब तक किसी अधिकारी ने संपर्क नहीं किया और न ही कोई ठोस कार्यवाही की। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएँ पेंशन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगाती हैं। राजस्थान व अन्य राज्यों में भी मृतक पेंशनरों की पेंशन निकाले जाने के कई मामले सामने आ चुके हैं।
शिकायतकर्ता कमला प्रसाद ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी नहीं बल्कि सरकारी खजाने की लूट है। मृतक के पुत्रों से 11 माह की अतिरिक्त राशि 18 प्रतिशत ब्याज सहित वसूल की जाए और उन पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हो। कोषागार विभाग ने दोनों पुत्रों को नोटिस जारी कर मृत्यु प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने या पिता का जीवित प्रमाण-पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। यदि दोष सिद्ध हुआ तो मामला धोखाधड़ी अधिनियम के तहत थाना सम्मनपुर में दर्ज किया जाएगा। यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है बल्कि यह भी दर्शाता है कि जीवित प्रमाण-पत्रों की समयबद्ध जांच और सत्यापन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। पेंशनरों और उनके परिजनों के लिए यह चेतावनी है कि मृत्यु अथवा अन्य परिवर्तन की सूचना समय पर देना अनिवार्य है, अन्यथा कानूनी कार्यवाही से बचना संभव नहीं होगा। जांच जारी है। जिला प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया है।


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