भक्ति, सेवा और संस्कारों से ही जीवन होता है सार्थक: पूज्य इंद्रेश कौशिक

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श्रीकृष्ण–रुक्मिणी विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर

अवधी खबर संवाददाता

अयोध्या / बीकापुर,। जनपद के ग्राम कुंडली, संजयगंज बाजार में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास परम पूज्य इंद्रेश कौशिक महाराज ने भगवान की लीलाओं का रसपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन भगवान की अनमोल देन है, जिसे भक्ति, सेवा और संस्कारों से ही सार्थक बनाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं और सच्चे मन से की गई भक्ति ही उन्हें प्रिय है।

गोपियों के श्रीकृष्ण के प्रति निस्वार्थ प्रेम का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जिस प्रकार मनुष्य संसारिक वस्तुओं से मोह करता है, उसी प्रकार यदि वह परमात्मा से प्रेम करे तो जीवन का वास्तविक उद्देश्य पूर्ण हो सकता है।विवाह केवल आयोजन नहीं, पवित्र संस्कार हैकथा के दौरान महाराज ने सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने विवाह संस्कार की महत्ता बताते हुए कहा कि विवाह केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक पवित्र अनुष्ठान है, जिसमें कन्यादान के माध्यम से पिता अपना धर्म निभाता है।उन्होंने चिंता जताई कि आधुनिक दौर में विवाह की परंपराओं और रीति-रिवाजों में तेजी से बदलाव हो रहा है, जिससे समाज की मूल भावनाएं प्रभावित हो रही हैं। पहले विवाह एवं भोजन की परंपराएं श्रद्धा और मर्यादा के साथ निभाई जाती थीं, जबकि आज कई स्थानों पर पारंपरिक मूल्यों की अनदेखी हो रही है।

उन्होंने बेटियों के कर्तव्यों पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि विवाह के बाद पुत्री का दायित्व है कि वह अपने ससुराल पक्ष के प्रति प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी निभाए।शिक्षा और संस्कार ही जीवन को देते हैं सही दिशाकथावाचक ने कहा कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता की आत्मा को दुख पहुंचाता है, वह कभी सच्चा सुख प्राप्त नहीं कर सकता। गुरु और संतों के मार्गदर्शन को जीवन में अपनाने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा और संस्कार ही मनुष्य को सही दिशा प्रदान करते हैं।छठे दिन की कथा में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

साथ ही रासलीला, कंस वध और कारागृह से माता-पिता की मुक्ति जैसे प्रसंगों का भी विस्तार से वर्णन किया गया। कथा पंडाल जयकारों और भक्ति गीतों से गूंज उठा।भक्ति रस में डूबा पूरा क्षेत्रकार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने भजनों पर नृत्य कर भगवान के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। कथा स्थल को भव्य रूप से सजाया गया था, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे।अंत में आरती और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजकों ने अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ लेने की अपील की।


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