अवधी खबर संवाददाता
अंबेडकरनगर ( प्रमोद वर्मा)।जनपद में गेहूं खरीद व्यवस्था किसानों के लिए राहत नहीं, बल्कि परेशानी का सबब बनती जा रही है। सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। किसान MSP का लाभ पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जबकि बिचौलिए और साहूकार खुलेआम फायदा उठा रहे हैं। क्रय केंद्रों पर “बोरी खत्म”, “सर्वर डाउन” और “कल आना” जैसे बहाने आम हो चुके हैं। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी किसानों को बिना खरीद के वापस लौटना पड़ रहा है।ऑनलाइन
पंजीकरण कराने के बावजूद उनकी उपज नहीं खरीदी जा रही, जिससे सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।किसानों का आरोप है कि केंद्र प्रभारी और बिचौलियों के बीच सांठगांठ के चलते उन्हें जानबूझकर टाला जा रहा है। मजबूरी में किसान अपनी फसल ₹2100 से ₹2200 प्रति क्विंटल के भाव पर बेचने को विवश हैं, जबकि MSP करीब ₹2585 प्रति क्विंटल घोषित है। यानी हर क्विंटल पर ₹300 से ₹400 तक का सीधा नुकसान अन्नदाताओं को झेलना पड़ रहा है।एक किसान ने गुस्से में कहा, “सरकार कहती है MSP मिलेगा, लेकिन यहां तो हमारी सुनने वाला कोई नहीं। अगर समय पर खरीद हो जाए, तो हमें घाटे में क्यों बेचना पड़े?”
📌 व्यवस्था पर बड़े सवालजब
MSP तय है, तो किसानों को उसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा?क्या क्रय केंद्रों पर कृत्रिम कमी पैदा कर बिचौलियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है?ऑनलाइन पंजीकरण के बाद भी खरीद न होना क्या सिस्टम की विफलता नहीं?लगातार मिल रही शिकायतों से साफ है कि समस्या किसी एक केंद्र की नहीं, बल्कि पूरे जनपद में फैली हुई है।
📌 बढ़ता आक्रोश, कार्रवाई की मांग
में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक संज्ञान लेता है और क्या अन्नदाताओं को उनका हक दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं, या फिर MSP सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।



