अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर।
शहर से लेकर कस्बों तक हर गली-मोहल्ले में मौत के ये नए ठिकाने खुले हैं अस्पताल, क्लीनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर लेकिन हकीकत में ये हैं बगैर योग्यता और अनुमति के संचालित जानलेवा धंधे! ये वो जगहें हैं जहां गरीब जनता बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर जाती है और बदले में जेब भी कटती है और जान भी जोखिम में पड़ जाती है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन पर निगरानी रखने वाले जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। कई मामलों में जब जांच टीम निकलती है, उससे पहले ही अस्पताल वालों को भनक लग जाती है। नतीजा मरीज हटा दिए जाते हैं, ताले डाल दिए जाते हैं, फर्नीचर उल्टा कर माहौल बंद दिखा दिया जाता है और टीम सिर्फ तस्वीरें खींचकर लौट जाती है।
जांच की औपचारिकता और कार्रवाई का ढोंग
शिकायतें लगातार मिलती हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं। मीडिया बार-बार इन झोलाछापों की पोल खोलता है, लेकिन कार्रवाई सिर्फ फाइलों में सिमट जाती है। लोगों का कहना है कि सीएमओ कार्यालय को इस फर्जी खेल की पूरी खबर होती है, लेकिन कार्रवाई की जगह वहां चुप्पी का इलाज चल रहा है।
प्रशासन की ‘मेहरबानी’ या मिलीभगत?
सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब बिना डिग्री वाले लोग खुलेआम नर्सिंग होम चला रहे हैं, तो उनका हौसला कौन बढ़ा रहा है? क्यों कार्रवाई से पहले ही खबर लीक हो जाती है? और क्यों बार-बार मिलने वाली शिकायतों के बाद भी अफसरों की नींद नहीं टूटती?





