तेज़ हवाओं और रुक-रुककर बारिश से खेतों में खड़ी फसल बर्बाद, रबी सीजन पर भी संकट के आसार
बस्ती। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ अब पूर्वी उत्तर प्रदेश में तबाही मचा रहा है। बस्ती जनपद में लगातार बदलते मौसम ने किसानों की कमर तोड़ दी है। चार दिनों से शुरू हुई रुक-रुक कर बारिश और तेज़ हवाओं ने धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में खड़ी फसल झुक गई है और लगातार नमी से दाने काले पड़ने लगे हैं।
जिले के सभी ब्लॉकों — गौर, हरैया, कप्तानगंज, रुधौली और बनकटी सहित अधिकांश क्षेत्रों में फसलों की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। किसानों का कहना है कि जो फसल पक चुकी थी और कटाई के इंतजार में थी, वह बारिश से पूरी तरह बर्बाद हो गई।
कुछ किसानों ने बताया कि जिनकी फसल पहले ही कट चुकी थी, वे भी पूरी तरह सूख नहीं पाईं। सुखाने की पर्याप्त जगह न होने के कारण कई जगह धान सड़ने लगा है। खेतों में जहाँ नीचे की परत गीली है, वहाँ दानों में अंकुरण शुरू हो गया है।
एक स्थानीय किसान ने कहा, “धान की बालियाँ पककर सुनहरी हो रही थीं। हम कटाई की तैयारी में थे, लेकिन बारिश ने सारी मेहनत मिट्टी में मिला दी।”
किसानों ने बताया कि उन्होंने उर्वरक और बिजली की किल्लत झेलते हुए धान की खेती की थी। सिंचाई के लिए रातभर ट्यूबवेल चलाया, लेकिन अब वही खेत कीचड़ और पानी में बदल गए हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह बारिश सिर्फ खरीफ सीजन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर रबी की फसलों पर भी पड़ सकता है। खेतों में पानी भरा रहा तो गेहूं, चना और मसूर की बुवाई में देर होगी, जिससे अगला फसल चक्र भी प्रभावित हो सकता है।
किसानों ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।





