अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। वर्ष 2016 के बहुचर्चित मंशाराम हत्याकांड में लगभग एक दशक लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) रामविलास सिंह की अदालत ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख कटेहरी माफिया अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही, मुलायम यादव और अजय कुमार यादव को साजिशन हत्या सहित अन्य धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही तीनों आरोपियों को दस दस हजार रुपए के अर्थ दंड से दंडित किया है।
वहीं आरोपी गिरेंद्र कुमार पांडेय को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया है। घटना के बाद दर्ज एफआईआर में छह लोगों को नामजद किया गया था। विवेचना के बाद पुलिस ने चार के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। लंबी सुनवाई के दौरान साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी माना, जबकि एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। मामला 23 मार्च 2016 का है।
सुल्तानपुर जिले के दोस्तपुर थाना क्षेत्र के किशनागरपुर गांव निवासी मंशाराम यादव को होली के दिन महरुआ थाना क्षेत्र के लोकनाथपुर गांव ले जाया गया था। आरोप है कि दावत के बहाने बुलाकर पहले से रची गई साजिश के तहत गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी।
अगले दिन सुल्तानपुर जिले के जयसिंहपुर थाना क्षेत्र में माइनर के पास शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। मृतक की हुआ चंद्राकली की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की थी।
करीब 10 वर्षों तक चले सत्र परीक्षण, गवाहों के बयान और कानूनी बहस के बाद अदालत ने फैसला सुनाया। फैसले के दौरान न्यायालय परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा और प्रशासन सतर्क दिखाई दिया।
करीब एक दशक बाद आए इस निर्णय को परिजनों और क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


