अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर (प्रमोद वर्मा)।
जनपद में बढ़ते अपराध के बीच अब पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिले के कई थानों और चौकियों पर तैनात पुलिसकर्मी वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं, जिससे शासन की ट्रांसफर नीति का समुचित पालन नहीं हो पा रहा है।
जानकारों का मानना है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे रहने से कुछ पुलिसकर्मियों की स्थानीय स्तर पर पकड़ मजबूत हो जाती है, जो निष्पक्ष कार्रवाई में बाधा बन सकती है। यही कारण है कि अपराध नियंत्रण के लिए बनाए गए ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे भी जमीनी हकीकत में कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा समय-समय पर पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए स्थानांतरण नीति लागू की जाती है, जिसके तहत एक निश्चित अवधि के बाद पुलिसकर्मियों का तबादला जरूरी होता है। लेकिन जनपद में कई ऐसे उदाहरण सामने आ रहे हैं, जहां यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक ही स्थान पर लंबे समय तक तैनाती से स्थानीय स्तर पर सांठगांठ की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इसका सीधा असर कानून-व्यवस्था पर पड़ता है और अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं। हाल के दिनों में लूट, चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं में बढ़ोतरी ने इस आशंका को और बल दिया है।
लगातार हो रही घटनाओं और पुलिस की सुस्त कार्रवाई के चलते आमजन का भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस बल में फेरबदल और सख्ती नहीं की गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
नवागत पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। एक ओर अपराध पर नियंत्रण की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर विभागीय व्यवस्था को दुरुस्त करने का दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि क्या जिले में लंबे समय से जमे पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करते हुए ट्रांसफर नीति का सख्ती से पालन कराया जाएगा, या फिर ‘जीरो टॉलरेंस’ केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।
जनता की निगाहें अब पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।




