स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच कच्ची राह और बुनियादी सुविधाओं का अभाव, मरीज और डॉक्टर परेशान

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अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकरनगर। एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर कटेहरी विकासखंड अंतर्गत औरंगनगर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाली का दंश झेल रहा है। 24 घंटे आपातकालीन और प्रसव जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं देने वाला यह केंद्र आज खुद अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा है।

औरंगनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के सैकड़ों मरीजों के लिए जीवनरेखा है। यहाँ प्रतिदिन ओपीडी में सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं, साथ ही गर्भवती महिलाओं की जांच और प्रसव जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं भी उपलब्ध हैं। लेकिन, अस्पताल के भीतर और बाहर की स्थिति हैरान करने वाली है।
अस्पताल परिसर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक अस्पताल बेनीपुर और राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल पहितीपुर भी संचालित हो रहे हैं। एक ही छत के नीचे तीन स्वास्थ्य सेवाओं के होने के बावजूद, यहाँ मरीजों और चिकित्साकर्मियों के लिए पीने के पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।

सबसे बड़ी समस्या अस्पताल तक पहुँचने वाले मार्ग की है। अस्पताल तक जाने वाली सड़क कच्ची है, जिसके कारण बारिश का मौसम आते ही स्थिति विकट हो जाती है।
आयुर्वेद महिला चिकित्साधिकारी डॉ. मनोज दुबे और होम्योपैथिक फार्मासिस्ट किरन नागर का कहना है कि सड़क की जर्जर स्थिति के कारण बारिश में घुटनों तक पानी और कीचड़ जमा हो जाता है। ऐसी स्थिति में मरीजों और खुद चिकित्सकों का अस्पताल तक पहुँचना दूभर हो जाता है।

महिला चिकित्सकों ने बताया कि पीने के पानी की कोई व्यवस्था न होने के कारण उन्हें और मरीजों को घर से पानी लाना पड़ता है। शौचालय न होने से स्टाफ, विशेषकर महिला स्वास्थ्यकर्मियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

अस्पताल परिसर में चल रहे आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक अस्पतालों को अब तक अपनी खुद की जमीन नहीं मिल सकी है, जिसके कारण इन अस्पतालों का अपना भवन निर्माण अधर में लटका हुआ है। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि जब तक जमीन का आवंटन नहीं होता, तब तक बुनियादी ढांचा विकसित करना मुश्किल है।

क्षेत्रीय लोगों और अस्पताल प्रशासन ने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि कम से कम स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँचने के लिए पक्की सड़क का निर्माण हो और अस्पताल परिसर में मरीजों की सुविधा के लिए पेयजल व शौचालय का उचित प्रबंध किया जाए।
एक संवेदनशील केंद्र होने के बावजूद, सुविधाओं के अभाव में मरीजों की जान जोखिम में डालना और चिकित्सकों की कार्यक्षमता को प्रभावित करना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। अब देखना यह है कि बारिश शुरू होने से पहले स्थानीय प्रशासन कच्ची सड़क और अन्य समस्याओं पर क्या कदम उठाता है।


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