प्रमोद कुमार वर्मा
अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। बसखारी क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की जांच उस समय सवालों के घेरे में आ गई जब शिकायतों की पड़ताल करने पहुंची सरकारी टीम को संबंधित डायग्नोस्टिक सेंटरों से न तो आवश्यक अभिलेख मिले और न ही अपेक्षित सहयोग। हालात ऐसे बने कि जांच टीम को बिना कार्रवाई पूरी किए लौटना पड़ा।
आईजीआरएस शिकायत के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बसखारी के अधीक्षक डॉ. अजय कुमार टीम के साथ जांच के लिए पहुंचे थे, लेकिन मौके पर जो स्थिति सामने आई उसने कई नए सवाल खड़े कर दिए। यदि सब कुछ नियमों के तहत संचालित हो रहा था तो रिकॉर्ड प्रस्तुत करने में परहेज क्यों किया गया? और यदि रिकॉर्ड उपलब्ध थे तो जांच टीम उन्हें देख क्यों नहीं सकी?सूत्रों के अनुसार लक्ष्मी डायग्नोस्टिक सेंटर, न्यू प्रांजल पैथोलॉजी सेंटर और जहांगीरगंज स्थित साक्षी डायग्नोस्टिक सेंटर जांच के दायरे में हैं।
चर्चा यह भी है कि कुछ संस्थानों के पंजीकरण और संचालन संबंधी दस्तावेजों को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी जांच टीम को ही सहयोग नहीं मिला तो आखिर इन संस्थानों का मनोबल इतना ऊंचा कैसे है? क्या इसके पीछे किसी प्रभावशाली संरक्षण का हाथ है या फिर नियम-कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है?मामले की गंभीरता को देखते हुए अधीक्षक डॉ. अजय कुमार ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उपजिलाधिकारी और पुलिस प्रशासन से सहयोग मांगा है।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। जनता जानना चाहती है कि जांच के दौरान अभिलेख न दिखाने वालों पर कार्रवाई होगी या नहीं।फिलहाल बसखारी में एक ही चर्चा है—क्या कानून अपनी ताकत दिखाएगा या फिर जांच की फाइलें भी अन्य मामलों की तरह सरकारी अलमारियों में धूल फांकती रह जाएंगी?




