18 साल से परिवार के पास मोबाइल नंबर, फिर भी दूसरे व्यक्ति का कोविड प्रमाणपत्र मिलने से उठे सवाल
अवधी खबर संवाददाता
अंबेडकरनगर। विकासखंड रामनगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े स्वास्थ्य विभाग के डिजिटल टीकाकरण रिकॉर्ड को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। एक ग्राम पंचायत में एक बच्ची के टीकाकरण, एक महिला को रिकॉर्ड में गर्भवती दर्शाए जाने तथा एक ही मोबाइल नंबर पर परिवार से असंबंधित व्यक्ति का कोविड टीकाकरण प्रमाणपत्र मिलने के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी है। इस संबंध में शिकायतकर्ता की ओर से केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली तथा उत्तर प्रदेश जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
मामले में उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड के अनुसार ग्राम पंचायत कवही में रामसुरेश के घर को टीकाकरण स्थल दर्शाते हुए एक के नाम से जारी ई-वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र में 22 अगस्त 2026 को टीकाकरण दर्ज है। प्रमाणपत्र में टीका लगाने वाले के रूप में आशा देवी तथा स्थान के रूप में कवही राम सुरेश का घर, अंबेडकर नगर दर्ज है। वहीं प्रमाणपत्र में DPT Booster 2 की तारीख 22 अगस्त 2026 दिखाई दे रही है।
परिजनों का आरोप है कि संबंधित बच्ची को उक्त दिन टीका नहीं लगाया गया, इसके बावजूद ऑनलाइन रिकॉर्ड में टीकाकरण पूरा दर्ज हो गया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि वास्तविक टीकाकरण के बिना यदि प्रविष्टि की गई तो इसे किस कर्मचारी या यूजर आईडी से दर्ज किया गया।
मामले में एक अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी सामने आया है, जिसमें एक महिला को Citizen (Pregnant woman) के रूप में दर्ज दिखाया गया है। जबकि उसके अनुसार ऐसी कोई स्थिति नहीं थी। यदि यह दावा सही पाया जाता है तो स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में यह डेटा किस आधार पर दर्ज किया गया, इसकी जांच जरूरी होगी।
मामले को और गंभीर बनाने वाला दावा यह है कि 22 अगस्त 2026 को संबंधित मोबाइल नंबर पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीकाकरण संबंधी OTP आया। मोबाइल धारक के अनुसार उसने OTP किसी को साझा नहीं किया। इसके बावजूद कुछ ही समय बाद टीकाकरण सफल होने का संदेश प्राप्त हो गया। इसे लेकर परिजनों ने OTP के दुरुपयोग की आशंका जताई है। हालांकि केवल OTP आने और सफल संदेश मिलने से सीधे OTP हैकिंग साबित नहीं होती। इसकी वास्तविक स्थिति U-WIN के सर्वर लॉग, प्रमाणीकरण रिकॉर्ड और संबंधित यूजर की गतिविधि की तकनीकी जांच से ही स्पष्ट हो सकती है।
इसी मोबाइल नंबर से जुड़ा एक और रिकॉर्ड सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। प्राप्त COVID-19 Vaccination Certificate में शशिकला नाम की 43 वर्षीय महिला का रिकॉर्ड है। प्रमाणपत्र के अनुसार उन्हें 07 दिसंबर 2021 को Covishield की पहली खुराक दी गई थी और टीकाकरण स्थल PHC Sewapuri Cluster 16, Varanasi, Uttar Pradesh दर्ज है। शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रमाणपत्र में दर्ज महिला का उनके परिवार से कोई संबंध नहीं है, जबकि जिस मोबाइल नंबर पर यह रिकॉर्ड उपलब्ध हुआ, वह नंबर परिवार द्वारा करीब 18 वर्षों से लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है।
शिकायतकर्ता के अनुसार इसी मोबाइल नंबर पर परिवार के सदस्यों के अलावा अन्य लोगों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड भी दिखाई दे रहे हैं। इससे यह जांच का विषय बन गया है कि अलग-अलग समय पर असंबंधित लाभार्थियों के रिकॉर्ड में यह मोबाइल नंबर किस आधार पर दर्ज किया गया और क्या प्रत्येक बार मोबाइल नंबर का विधिवत सत्यापन हुआ था।
परिजनों का यह भी आरोप है कि बच्ची के टीकाकरण की कई खुराकें वास्तविक टीकाकरण के बिना ऑनलाइन रिकॉर्ड में पूरी दिखाई गईं। हालांकि उपलब्ध प्रमाणपत्र से यह केवल प्रमाणित होता है कि संबंधित तारीखों पर सिस्टम में टीकाकरण की प्रविष्टियां दर्ज हैं। वास्तव में टीका लगाया गया था या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण मौके की जांच और स्वास्थ्य विभाग के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के बाद ही किया जा सकता है।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण जांच U-WIN के ऑडिट और सर्वर लॉग की होगी। इसमें यह पता लगाया जा सकता है कि बच्ची की 22 अगस्त वाली प्रविष्टि किस समय, किस यूजर आईडी और किस माध्यम से दर्ज हुई। साथ ही OTP का सत्यापन कैसे हुआ, प्रमाणपत्र किसने जारी किया, “कवही राम सुरेश के घर” को टीकाकरण स्थल के रूप में किसने दर्ज किया तथा संबंधित महिला को गर्भवती के रूप में दर्ज करने वाली प्रविष्टि किस कर्मचारी ने की।
एक ही मोबाइल नंबर पर परिवार से असंबंधित महिला का वर्ष 2021 का कोविड प्रमाणपत्र और वर्तमान में U-WIN से जुड़े अलग-अलग रिकॉर्ड मिलने के दावों के बाद स्वास्थ्य विभाग की डिजिटल डेटा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। मामला डेटा एंट्री की गलती है, गलत मोबाइल नंबर दर्ज हुआ है या जानबूझकर रिकॉर्ड में हेरफेर की गई है, इसका सच विभागीय और तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा।
शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले से संबंधित स्क्रीनशॉट, डिजिटल टीकाकरण प्रमाणपत्र और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर CPGRAMS तथा उत्तर प्रदेश जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। शिकायत में U-WIN रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर से जुड़े असंबंधित लाभार्थियों के विवरण, OTP प्रक्रिया तथा संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों की डिजिटल गतिविधियों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की गई है।
अब मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच और संबंधित अधिकारियों के पक्ष का इंतजार है।





