बीएसए ने पांच आरोपों में की कार्रवाई, चेक बाउंस होने और नोटिसों का जवाब नहीं देने का भी मामला, विभागीय जांच शुरू
अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर (प्रमोद वर्मा)। विद्यालय से गैरहाजिरी, नौकरी दिलाने के नाम पर धनराशि लेने की शिकायतें और बैंक चेक बाउंस होने के मामले में टांडा शिक्षा क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय फूलपुर दयालपुर के इंचार्ज प्रधानाध्यापक राम श्याम पटेल पर विभागीय कार्रवाई की गाज गिरी है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने पांच आरोपों के आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। 30 अक्टूबर को जारी आदेश में विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी रामनगर को जांच अधिकारी नामित किया गया है। निलंबन अवधि में प्रधानाध्यापक को उच्च प्राथमिक विद्यालय त्रिलोकपुर, टांडा से संबद्ध किया गया है।
मामले की शुरुआत विद्यालय में शिक्षकों की अनुपस्थिति की शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता रविन्द्र वर्मा की ओर से दर्ज आईजीआरएस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फूलपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर में संचालित उच्च प्राथमिक विद्यालय में करीब 25 बच्चे नामांकित होने के बावजूद निरीक्षण के दौरान बच्चे बिना शिक्षक के मौजूद मिले। शिकायत के मुताबिक, इंचार्ज प्रधानाध्यापक राम श्याम पटेल और सहायक अध्यापक जयप्रकाश मौके पर नहीं थे। विद्यालय का गेट अंदर से बंद था और बच्चों को ही उसे खोलने-बंद करने की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही थी।
शिकायत के बाद खंड शिक्षा अधिकारी टांडा ने 9 मार्च 2026 को विद्यालय का स्थलीय निरीक्षण किया। जांच आख्या के अनुसार, प्रधानाध्यापक उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर करने के बाद विद्यालय से बाहर चले गए थे। इसके बाद विभाग ने 24 मार्च को स्पष्टीकरण मांगा। जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर 5 अक्टूबर को 25 फरवरी और 9 मार्च की अनुपस्थिति से संबंधित वेतन काटने की कार्रवाई की गई।
विभागीय आदेश में राम श्याम पटेल और उनकी पत्नी रीता वर्मा के खिलाफ नौकरी दिलाने के नाम पर धनराशि लेने संबंधी कई शिकायतों का उल्लेख किया गया है। इनमें वाराणसी की अनीता यादव, लखीमपुर खीरी की प्रिया त्रिवेदी और नितिन सिंह तथा अंबेडकरनगर के राकेश कुमार की शिकायतें शामिल हैं।
प्रिया त्रिवेदी और नितिन सिंह की शिकायतों के संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग ने 6 जून 2026 को राम श्याम पटेल और उनकी पत्नी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। 10 जून को अपना पक्ष रखते हुए प्रधानाध्यापक ने नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये लेने से इनकार किया। उनका कहना था कि धनराशि जमीन दिलाने के लिए ली गई थी, लेकिन समय से जमीन उपलब्ध नहीं करा सके। उन्होंने दोनों शिकायतकर्ताओं को 10 जुलाई तक पूरी धनराशि लौटाने का आश्वासन दिया था।
विभागीय जांच आख्या के मुताबिक, राम श्याम पटेल ने नितिन सिंह और प्रिया त्रिवेदी को ढाई-ढाई लाख रुपये के दो चेक जारी किए थे। दोनों चेक बैंक ऑफ बड़ौदा के थे। शिकायतकर्ताओं ने बाद में आरोप लगाया कि खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गए और उन्हें रकम वापस नहीं मिल सकी।
इसके बाद विभाग ने 14 जुलाई से 20 अगस्त के बीच कई बार स्पष्टीकरण नोटिस जारी किए। निलंबन आदेश के अनुसार, संबंधित शिक्षक ने इन नोटिसों का जवाब नहीं दिया। मामले की प्रारंभिक जांच खंड शिक्षा अधिकारी अकबरपुर को सौंपी गई थी। जांच अधिकारी ने 16 अक्टूबर को रिपोर्ट प्रस्तुत कर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की।
बीएसए के आदेश में प्रधानाध्यापक के खिलाफ पांच आरोप निर्धारित किए गए हैं। इनमें निरीक्षण के दौरान हस्ताक्षर करने के बाद विद्यालय से अनुपस्थित रहना, नौकरी दिलाने के नाम पर धनराशि लेने संबंधी शिकायतें, शिक्षक के दायित्वों से इतर कार्यों में संलिप्तता, विभागीय नोटिसों का जवाब नहीं देना तथा कर्मचारी आचरण नियमावली के विपरीत कार्य करना शामिल है।
बीएसए ने प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के आधार पर निलंबन की कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच शुरू करा दी है। जांच अधिकारी को आरोपपत्र जारी करने और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
अब विभागीय जांच पर निगाहें: प्रधानाध्यापक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच के निष्कर्षों के बाद ही होगी। नौकरी के नाम पर धनराशि लेने की शिकायतें, चेक बाउंस होने का मामला और विद्यालय में अनुपस्थिति से जुड़े आरोप जांच के प्रमुख बिंदु रहेंगे।




