अकबरपुर तहसील में फरियादियों को नही मिल पा रहा न्याय

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जिम्मेदार सरकारी जमीन को बचाने में भी नहीं ले रहे कोई रुचि

प्रमोद कुमार वर्मा
अंबेडकरनगर(अवधी खबर)।
अकबरपुर तहसील में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि शिकायती पत्र देने के बाद कार्रवाई हो पाना बहुत ही मुश्किल हो गया है।
जिम्मेदार अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त होने के बाद भी सरकारी जमीन को बचाने में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सीधा निर्देश है की किसी सरकारी जमीन पर कोई कब्जा न कर पाए फिर भी अकबरपुर तहसील के अधिकारियों को इस बात का कोई प्रभाव नहीं है सभासद के द्वारा दिए गए शिकायती पत्र के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा नहीं की गई है और न ही पंचायत भवन की सरकारी जमीन को संरक्षित कराया गया है।


अकबरपुर नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत गोविंद गणेशपुर वार्ड नंबर 16 के सभासद कंचन वर्मा ने बीते 4 फरवरी को उप जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर बैरमपुर बरवा गांव में पंचायत भवन के नाम दर्ज गाटा संख्या 448 की पैमाइश करते हुए सरकारी जमीन को संरक्षित करने की मांग किया था। लगभग डेढ़ माह का समय बीत गया अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है अधिकारी इस मामले में कोई रुचि नहीं दिख रहे हैं।
वही दूसरा मामला अकबरपुर तहसील क्षेत्र के कोटवा महमदपुर गांव का है। जहां ग्राम प्रधान पति के द्वारा सड़क किनारे स्थित बेस कीमती सरकारी भूमि गाटा संख्या 572 पर अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए अवैध रूप से दीवाल बनाकर लोहे का गेट लगाकर कब्जा कर लिया है। क्षेत्र पंचायत सदस्य समेत दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने सामूहिक शिकायती पत्र उपजिलाधिकारी को सौंपा था लेकिन उस पर भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। वही ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि ग्राम प्रधान पति ने क्षेत्रीय लेखपाल से अवैध कब्जा हटवाने के बजाय मिली भगत कर लिया गया है। जिसकी शिकायत दोबारा ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से की है।

 तीसरा मामला तहसील क्षेत्र के पियारेपुर गांव का है। 

गरीब महिला शिमला गुप्ता न्याय के लिए दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हो चुकी है। शिकायती पत्र देने के बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। आश्वासन तक ही सारा मामला सीमित है। महिला का आरोप है कि उसके विपक्षी उसके जमीन के कुछ अंश पर कब्जा कर लिए हैं जिसे खाली करने को तैयार नहीं है। कई बार शिकायती पत्र दिया लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उपजिलाधिकारी को शिकायत पत्र देकर एक बार फिर पुलिस बल से मकान को खाली करवाने की मांग की है।

फरियादी तहसील का चक्कर काटते काटते जा रहे थकहार

जनता दर्शन में दिए जा रहे शिकायती पत्र पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। शिकायती पत्रों को कूड़ेदान में डाल दिया जा रहा है। जिनका पता नहीं चल पा रहा दिए गए शिकायती पत्र कहां गए। लगातार फरियादी तहसील का चक्कर काटते काटते थक हार जा रहे हैं। अंत में निराशाजनक होकर उच्च अधिकारियों को शिकायत पत्र देने को मजबूर हो जाते हैं लेकिन उच्च अधिकारियों को दिए गए शिकायती पत्र भी तहसील स्तर के अधिकारियों के पास आता है उसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है जांच के नाम पर केवल शिकायत कर्ता को गुमराह किया जा रहा है। फर्जी रिपोर्ट लगाकर अख्या प्रस्तुत कर दी जा रही है। जिम्मेदार अधिकारी भी उसी के आधार पर निस्तारित कर दे रहे हैं।


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