गौर, बस्ती। विकासखंड गौर की ग्राम पंचायत तेनुआ में मनरेगा योजना के तहत कराए जा रहे चकरोड पटाई व चकबंध निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। आरोप है कि 63 मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाकर कागजों में काम दिखाया गया, जबकि धरातल पर मजदूरों का कोई अस्तित्व नहीं मिला।
सूत्रों के अनुसार मनरेगा की धारा-4 को दरकिनार करते हुए फर्जी फोटो अपलोड कर कार्य पूर्ण दर्शाया गया। बताया जा रहा है कि ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव की आपसी साठगांठ से जॉब कार्ड धारकों को काम से वंचित कर दिया गया और कागजों में उपस्थिति दर्ज कर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
ग्रामीणों का कहना है कि टावर से राम सहाय के चक तक तथा पीच रोड से पुल तक दिखाए गए चकबंध निर्माण कार्य में वास्तविक रूप से कोई कार्य नहीं हुआ। मौके पर न तो मजदूर दिखे और न ही कार्य के कोई ठोस प्रमाण मिले। इसके बावजूद मनरेगा पटल पर फर्जी तस्वीरों के सहारे काम दिखाया जा रहा है।
मामले में प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप यह भी है कि मनरेगा एपीओ की उदासीनता के चलते यह खेल लंबे समय से चल रहा है। वहीं, बी.डी.ओ. गौर पर भी आंख मूंदे रहने के आरोप लग रहे हैं।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब ग्राम पंचायत में वास्तविक मनरेगा कार्य ही नहीं मिलेगा, तो मजदूरों का जीवन-यापन कैसे होगा? कागजों में चल रहा मनरेगा और धरातल से गायब काम अब जांच का विषय बन गया है।
जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की मनमानी से सरकारी योजनाओं की मंशा पर पानी फिरता दिख रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या मामला यूं ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा।





