अवधी खबर संवाददाता
अयोध्या।अयोध्याधाम की पावन पवित्र भूमि से पधारे परम श्रद्धेय श्री इंद्रेश कौशिक जी द्वारा बीकापुर में आयोजित श्री राम कथा एवं श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर श्रद्धालुओं ने भक्ति रस में सराबोर होकर दिव्य प्रसंगों का श्रवण किया। कथा के तीसरे दिन सृष्टि वर्णन, भगवान के अवतारों और महान भक्तों की प्रेरणादायी कथाओं का विस्तार से वर्णन किया गया।
कथाव्यास ने बताया कि सृष्टि की उत्पत्ति कैसे हुई और किस प्रकार भगवान समय-समय पर विभिन्न अवतार धारण कर धर्म की रक्षा करते हैं।
इस दौरान ब्रह्मा जी की उत्पत्ति का सुंदर वर्णन करते हुए भगवान के वामन और वाराह अवतार की महिमा का गुणगान किया गया। वामन अवतार के माध्यम से भगवान द्वारा असुरराज बलि के अभिमान हरण और वाराह अवतार द्वारा पृथ्वी उद्धार का प्रसंग सुनाकर धर्म की स्थापना का संदेश दिया गया।
कथा में प्रह्लाद के अटूट विश्वास और निर्भय भक्ति का मार्मिक वर्णन किया गया। बताया गया कि उन्होंने माता के गर्भ में ही नारायण नाम का मंत्र सुना था, जिसके प्रभाव से वे बचपन से ही भगवान की भक्ति में लीन हो गए। विपरीत परिस्थितियों और अत्याचारों के बावजूद उनकी अटूट श्रद्धा डिगी नहीं। यह प्रसंग श्रद्धालुओं को सच्ची आस्था और निडर भक्ति का संदेश देता है।
इसी क्रम में ध्रुव की कठोर तपस्या और निष्कलंक भक्ति का प्रेरक प्रसंग सुनाया गया। बालक ध्रुव की दृढ़ निष्ठा से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें अमर पद प्रदान किया। ध्रुव चरित्र के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सच्चे मन और अटूट संकल्प से की गई भक्ति अवश्य फलदायी होती है।
कथा के तृतीय दिवस का मुख्य संदेश भक्ति और वैराग्य रहा। कथाव्यास ने कहा कि सांसारिक मोह-माया का त्याग कर जब मनुष्य भगवान की शरण में जाता है, तभी उसका मन निर्मल होता है और जीवन सफल बनता है। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर भजनों का आनंद लिया और प्रभु स्मरण के साथ आत्मिक शांति का अनुभव किया।
समापन पर आरती और प्रसाद वितरण के साथ तीसरे दिन की कथा सम्पन्न हुई। क्षेत्र के श्रद्धालुओं में कथा को लेकर विशेष उत्साह देखा गया तथा अगले दिन के प्रसंगों को सुनने की उत्सुकता भी बनी हुई है।


