पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल
अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। अधिवक्ता पर जानलेवा हमले मामले में तीन आरोपियों के गिरफ्तारी के बाद अन्य नामजद आरोपियो की गिरफ्तारी न हो पाने के कारण मंगलवार को अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी करने की मांग की है। इस मौके पर हजारों की संख्या में अधिवक्ता कचहरी से पैदल कूच करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर करीब डेढ़ घंटे तक जोरदार प्रदर्शन करने के बाद जिलाधिकारी को मजबूर होकर बाहर निकाल कर ज्ञापन लेना पड़ा।

आरोपियों के जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया।वहीं दूसरी तरफ अभी भी अधिवक्ताओं में आक्रोश देखने को मिल रहा है फिरहाल सोमवार को अधिवक्ताओं ने साथी अधिवक्ता प्रभात मिश्रा के आरोपियों की गिरफ्तारी तक हड़ताल करने का ऐलान किया है।
आपको बता दे शनिवार शाम करीब 3:30 बजे अधिवक्ता प्रभात मिश्रा अपने घर समंथा गांव से अकबरपुर जा रहे थे इसी बीच महरुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत तरसावा गेट के पास अधिवक्ता की कार को रोककर ताबड़तोड़ हांकी व लोहे की रॉड से वार कर दिया जिससे अधिवक्ता बुरी तरीके से घायल हो गए व उनकी गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद साथी अधिवक्ता पंकज पांडेय की तहरीर पर महरुआ पुलिस ने 11 नामजद समेत आधा दर्जन अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था।
महरूआ थानाध्यक्ष की भूमिका और हल्का सिपाही की भूमिका पर संदेह
महरुआ थानाध्यक्ष की भूमिका भी पूरे मामले में संदिग्ध नजर आ रही है वहीं दूसरी तरफ एक हल्का सिपाही की भी भूमिका संदिग्ध है, हल्का सिपाही का नामजद अपराधियों के साथ बातचीत समेत अन्य गतिविधियां लोगों में चर्चा का विषय अब बन चुका हैं। वहीं बड़ी बात है कि कई दिनों से उन आरोपियों के खिलाफ अधिवक्ता के द्वारा शिकायती पत्र देने के बाद महरुआ थानाध्यक्ष के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। जिसके चलते इतनी बड़ी घटना अधिवक्ता के साथ घटित हुई हल्का सिपाही नितिन सिंह का इन अपराधियों से गठजोड़ देखा जा सकता है। पुलिस विभाग अगर अपने ही सिपाही का कॉल डिटेल अगर निकलेंगे तो पूरा मामला साफ हो जाएगा की किस तरीके से अपराधियों के साथ इस सिपाही का गठजोड़ था और संरक्षण प्राप्त था जिसके चलते क्षेत्र में इतनी बड़ी घटना घटित हो सकी।
गठित टीम तीन अपराधियों को गिरफ्तार करने में अभी तक हो पाई सफल
मारपीट की घटना के बाद पुलिस अधीक्षक ने घटना की सफल अनावरण के लिए तीन टीमों का गठन किया था। जिसमें स्वाट सविलेंस व महरुआ थाने की टीम अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए लगाई गई थी लेकिन बड़ी बात है कि उसी रात केवल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी जिसमें विशाल जिलाजीत व चंद्रजीत को पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता पाई थी। लेकिन दो दिन बीत गया अभी तक पुलिस को नामजद आरोपियो में से कोई अन्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं कर पाई है। पुलिस जिन मुखबिर और खुफिया तंत्र के इशारे पर बड़े-बड़े खुलासे का काम करती है वह भी आज इस मामले में फेल नजर आ रहे हैं।
विश्व सूत्र यह भी बता रहे हैं कि आरोपियों का सफेदपोश का संरक्षण प्राप्त है जिसके चलते पुलिस सही दिशा में काम नहीं कर रही है। पुलिस काम कम दिखावा ज्यादा कर रही है। इन्हीं तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले को धीरे-धीरे ठंडा बस्ते में डालने का प्रयास कर रही है। विश्व सूत्र यह भी बता रहे हैं कि कुछ अपराधी रात के अधेरे में घर तक भी जा रहे हैं कुछ दिन में भी जिन पर पुलिस के मुखबिर काम नहीं कर पा रहे हैं।
महरुआ पुलिस के कार्यप्रणाली पर पहले से भी सवाल
महरुआ थाना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर संचालित हो रहे अवैध नशीले पदार्थ के अड्डे पर गुजरात एसटीएफ के छापेमारी के बाद महरुआ पुलिस पर सवाल खड़े होने लगे थे कि आखिर मलवानिया गांव के बंद पड़े मुर्गी फार्म में इतने बड़े मात्रा में सिंथेटिक नशीला पदार्थ बनाने का काला कारोबार चल रहा था जिसका जाल अम्बेडकरनगर से गुजरात तक फैला था आखिर इसकी भनक महरुआ पुलिस को अब तक क्यों नहीं लगी थी कहीं महरुआ पुलिस के संरक्षण में ऐसा कार्य तो नहीं हो रहा था। आखिर पुलिस के मुखबिर और खुफिया तंत्र क्या कार्य कर रहे थे इनको इसकी जानकारी नहीं थी फिर हाल गुजरात एसटीएफ ने इतने बड़े कारोबार का भंडाफोड़ कर महरूआ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया है।




