अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। अधिवक्ता प्रभात मिश्रा पर हुए जानलेवा हमले के मामले में जहां पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, वहीं अब इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। घटना में प्रयुक्त वह संदिग्ध वाहन, जिससे हमलावरों ने अधिवक्ता की कार को रोककर वारदात को अंजाम दिया था, अब तक पुलिस बरामद नहीं कर सकी है।
गौरतलब है कि बीते शनिवार महरुआ थाना क्षेत्र के तरसावा गेट के पास अधिवक्ता प्रभात मिश्रा पर सुनियोजित तरीके से हमला किया गया था। हमलावरों ने पहले उनकी कार को रोका और फिर लाठी-डंडों व लोहे की रॉड से ताबड़तोड़ प्रहार कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। हमलावरों का इरादा न केवल हमला बल्कि अपहरण करने का भी था, क्योंकि मारपीट के बाद अधिवक्ता को गाड़ी में भरकर अपहरण करने का भी प्रयास किया लेकिन हल्ला गुहार होने पर छोड़कर चले गए। जिसके लिए बिना नंबर प्लेट के वाहन का इस्तेमाल किया गया था।
मामले में अधिवक्ता पंकज पांडेय की तहरीर पर 11 नामजद व आधा दर्जन अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए विशाल तिवारी, जिलाजीत, चंद्रजीत और इंद्रजीत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन वारदात की अहम कड़ी माने जा रहे वाहन का अब तक कोई सुराग नहीं लग सका है।
जानकारी के मुताबिक, हमलावर जिस वाहन से पहुंचे थे, उसी का इस्तेमाल अधिवक्ता को जबरन उठाने की योजना में किया गया था। ऐसे में वाहन की बरामदगी इस पूरे केस की साजिश और अन्य फरार आरोपियों तक पहुंचने में अहम भूमिका निभा सकती है।
महरुआ थानाध्यक्ष का कहना है कि पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर फरार आरोपियों के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं। हालांकि, वाहन की बरामदगी न हो पाना जांच की रफ्तार पर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल, चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी इस हाई-प्रोफाइल मामले में कई अहम पहलू अभी भी अधूरे हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस कब तक वारदात में प्रयुक्त वाहन को बरामद कर पूरी साजिश से पर्दा उठाती है।




