बसखारी के बनियानी में जादुई शौचालय! बिना कनेक्शन बना, कागजों में मरम्मत—जमीनी हकीकत ने खोली पोल

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अम्बेडकर नगर।जनपद के विकास खंड बसखारी अंतर्गत ग्राम सभा बनियानी में पंचायत भवन से जुड़ा एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है, जहां शौचालय निर्माण और मरम्मत को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत भवन में निर्मित शौचालय केवल दिखावे तक सीमित है, क्योंकि शौचालय कक्ष से टंकी तक पाइप का कनेक्शन ही नहीं दिया गया। नतीजतन यह पूरी व्यवस्था शुरू होने से पहले ही बेकार हो गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि शौचालय अब टूट-फूट की स्थिति में पहुंच चुका है, लेकिन इसके बावजूद पंचायत भवन की रंगाई-पुताई और अन्य मरम्मत कार्यों पर नियमित रूप से खर्च दिखाया जा रहा है और भुगतान भी किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा अधूरी और जर्जर है, तो उसकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई?

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सरकारी कार्यालय में शौचालय की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक होती है, ताकि वहां कार्यरत अधिकारी-कर्मचारी एवं आने वाले नागरिकों को सुविधा मिल सके। लेकिन बनियानी पंचायत भवन की स्थिति इसके ठीक विपरीत नजर आती है। ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय के अभाव में कर्मचारी बाहर खुले में जाने को मजबूर हैं, जो स्वच्छता अभियान की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।

मामले का दूसरा पहलू यह भी सामने आ रहा है कि पंचायत भवन नियमित रूप से खुलता ही नहीं है। यदि भवन बंद रहता है, तो सरकारी योजनाओं का संचालन और पारदर्शिता दोनों प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान की मिलीभगत से कार्यों में अनियमितता हो रही है, जिससे जवाबदेही तय नहीं हो पा रही।

इसके साथ ही हाल ही में संचालित वृक्षारोपण अभियान पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में पौधरोपण को पूर्ण दिखा दिया गया, जबकि वास्तविकता में पौधों को पंचायत भवन से सटे कूड़ा घर के पास फेंक दिया गया, जहां वे देखरेख के अभाव में नष्ट हो रहे हैं। यह स्थिति न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के दावों को भी कटघरे में खड़ा करती है।

जांच की मांग तेज
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो संबंधित अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही पंचायत स्तर पर होने वाले कार्यों की निगरानी को सुदृढ़ किया जाए, ताकि योजनाओं का लाभ सही रूप में जनता तक पहुंच सके।


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