अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। भीटी तहसील इन दिनों वकीलों और उपजिलाधिकारी के बीच चल रहे टकराव को लेकर सुर्खियों में है। दोनों पक्षों के बीच जारी विवाद का खामियाजा सीधे तौर पर वादकारियों को भुगतना पड़ रहा है, जिससे आम जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
बताया जा रहा है कि वकीलों द्वारा आए दिन हड़ताल और कंडोलेंस किए जाने के बावजूद एसडीएम धर्मेंद्र कुमार सिंह कोर्ट की कार्यवाही जारी रखने पर अड़े रहते हैं।
इसी क्रम में बुधवार को भी वकीलों ने कंडोलेंस कर न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया, लेकिन इसके बावजूद एसडीएम ने अदालत में सुनवाई शुरू कर दी।
सूत्रों के अनुसार, वकीलों की गैरमौजूदगी में एसडीएम द्वारा वादकारियों से सीधे पूछताछ कर फाइलों को आदेश के लिए सुरक्षित कर लिया गया। वकीलों ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया और एसडीएम कोर्ट का बहिष्कार कर दिया।
वादकारियों का आरोप है कि इस खींचतान में उनका काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहले भी बिना वकीलों के सुनवाई हुई, लेकिन समय पर आदेश पारित नहीं किए गए, जिससे उन्हें बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
वहीं, वकीलों का आरोप है कि तहसील में भ्रष्टाचार चरम पर है। नकल से लेकर आय-जाति प्रमाण पत्र जैसे सामान्य कार्यों के लिए भी लोगों को सिफारिश और सेवा का सहारा लेना पड़ता है। उनका कहना है कि बिना पैसे के कोई काम नहीं होता, जिससे आम जनता शोषण का शिकार हो रही है।
इस पूरे मामले पर भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष पवन कुमार सिंह ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि भीटी तहसील में भ्रष्टाचार व्याप्त है और यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो संगठन बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा। क्षेत्रीय लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि भीटी तहसील की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराकर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जाए और आम जनता को राहत दिलाई जाय।




