भुगतान जांच पर उठे सवाल, शिकायतकर्ता ने निस्तारण को बताया भ्रामक

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अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकरनगर। जनपद के विकासखंड टांडा अंतर्गत ग्राम सभा रसूलपुर मुबारकपुर में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से किए गए भुगतानों में कथित अनियमितताओं की शिकायत पर प्रशासन द्वारा भले ही जांच के बाद मामले को निराधार करार दे दिया गया हो, लेकिन अब इस प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। शिकायतकर्ता ने निस्तारण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे भ्रामक और अपूर्ण बताया है तथा उच्चस्तरीय पुनः जांच की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत संख्या 40017826004099 में आरोप लगाया गया था कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ग्राम सभा में किए गए कई भुगतानों में प्रक्रियागत एवं वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। शिकायत में कहा गया था कि कई बिल-वाउचर बिना हस्ताक्षर, दिनांक तथा ‘पेड एंड कैंसिलेशन’ प्रक्रिया पूर्ण किए बिना ही अपलोड कर भुगतान किए गए, जो शासनादेशों का उल्लंघन है। साथ ही ‘राजा ट्रेडर्स’ नामक फर्म से जुड़े बिलों में भी गड़बड़ी की आशंका जताई गई थी।

इस मामले की जांच सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), टांडा द्वारा की गई। जांच आख्या में बताया गया कि संबंधित फर्म के तीन बिलों का परीक्षण किया गया, जो इंटरलॉकिंग कार्य से संबंधित थे। रिपोर्ट के अनुसार सभी बिलों पर आवश्यक हस्ताक्षर, दिनांक और पेड एवं कैंसिलेशन प्रक्रिया पूर्ण पाई गई तथा कार्य प्राक्कलन के अनुरूप मानक गुणवत्ता में कराया गया। कंसल्टिंग इंजीनियर की माप के आधार पर भुगतान किए जाने की पुष्टि करते हुए शिकायत को प्रथम दृष्टया निराधार बताया गया।

हालांकि, शिकायतकर्ता ने इस निस्तारण पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि जिस माह के भुगतान में अनियमितता की शिकायत की गई थी, उसकी जांच न कर किसी अन्य माह के बिलों को आधार बनाकर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई, जो तथ्यात्मक रूप से गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी द्वारा न तो उनसे संपर्क किया गया और न ही शिकायत के मूल बिंदुओं की समुचित जांच की गई।शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि मामले को स्पेशल क्लोज श्रेणी में डालकर निस्तारित किया गया, जिससे उन्हें फीडबैक देने का अवसर नहीं मिल सका, जबकि यह प्रक्रिया पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है।

उनके अनुसार इस तरह का निस्तारण न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि इससे पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े होते हैं। इधर, स्थानीय स्तर पर भी इस प्रकरण को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं और जांच की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।


शिकायतकर्ता ने सहायक विकास अधिकारी (पं) की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए ऑनलाइन माध्यम से पुनः शिकायत दर्ज कराई है तथा पूर्व शिकायत के पुनः निरीक्षण और स्वतंत्र जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि यदि आवश्यक हुआ तो वह उच्च अधिकारियों एवं शासन स्तर तक इस प्रकरण को उठाएंगे। फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक जांच और पारदर्शिता के मानकों को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन शिकायतकर्ता की मांग पर क्या रुख अपनाता है और क्या इस प्रकरण में पुनः जांच के आदेश दिए जाते हैं या नहीं।


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