अम्बेडकरनगर।
जनपद के विकासखंड बसखारी अंतर्गत ग्राम सभा केवटला स्थित मठ एवं मंदिर से जुड़ा विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने को लेकर ग्राम पंचायत सचिव अशोक राजभर और मंदिर के पुजारी मनीष यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले ने न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूर्व ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका को भी जांच के दायरे में ला दिया है।
सूत्रों के अनुसार, केवटला मठ के मुख्य महंत की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत सचिव अशोक राजभर ने पुजारी मनीष यादव का नाम परिवार रजिस्टर में गलत तरीके से दर्ज किया। इसी आधार पर दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। हालांकि, ग्राम प्रधान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि नाम दर्ज करने की प्रक्रिया नियमानुसार ग्राम पंचायत की खुली बैठक में की गई थी।
मामले में नया मोड़ तब आया जब यह बात सामने आई कि इससे पहले पूर्व ग्राम पंचायत सचिव अंकुर शर्मा के हस्ताक्षर से परिवार रजिस्टर की नकल जारी की गई थी, जबकि संबंधित नाम मूल रजिस्टर में दर्ज नहीं था। इस विसंगति को लेकर ग्रामीणों ने हस्ताक्षरों की जांच की मांग उठाई है। यदि जांच में अनियमितता पाई जाती है, तो पूर्व सचिव अंकुर शर्मा पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि मठ से जुड़े हरिशंकर उर्फ बुलबुली बाबा द्वारा मठ की जमीन और पेड़-पौधों की बिक्री की जा रही है, जिसका पुजारी मनीष यादव विरोध कर रहे थे। ग्रामीणों का दावा है कि इसी विरोध के चलते उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। साथ ही, बुलबुली बाबा के आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े होने के भी आरोप लगाए गए हैं।
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि बुलबुली बाबा का नाम अलग-अलग जनपदों आजमगढ़ और अंबेडकरनगर की ग्राम सभाओं के परिवार रजिस्टर में दर्ज होने की बात कही जा रही है। यदि यह तथ्य सही पाया जाता है, तो उनके खिलाफ धोखाधड़ी (धारा 420) के तहत कार्रवाई की संभावना भी बन सकती है।
इधर, हंसवर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ विभागीय स्तर पर अभी दोष सिद्ध नहीं हुआ था, इसके बावजूद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया।
फिलहाल, पूरा मामला जांच के अधीन है और प्रशासनिक व पुलिसीय जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों और संबंधित पक्षों की मांग है कि निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि ग्राम पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रह सके।



