अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में 21 मई को मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य के तत्वावधान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) मेंटल हेल्थ एंड वेल- बीइंग कमेटी के अंतर्गत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ0 पारुल यादव एवं डॉ0 सुधांशु चंदेल ने तनाव , उसके कारण, प्रकार, प्रभाव एवं उसके प्रबंधन के साथ साथ समय प्रबंधन पर भी विस्तार से व्याख्यान दिया।
इसमें मेडिकल कॉलेज की उपचारिकाएं भी मौजूद थीं जिन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किये। कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग छात्र छात्राओं के अलावा सर सुंदर लाल कॉलेज ऑफ नर्सिंग से भी आये बच्चों ने प्रतिभाग किया। साथ ही कई पीजी छात्र छात्राएं भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बताया गया कि इसी प्रकार से जागरूकता फैला करके अवसाद एवं उसमें देखी जाने वाली अति गंभीर समस्या, आत्महत्या की घटनाओं को कम किया जा सकता है।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को मानसिक तनाव, भावनात्मक दबाव तथा बदलती जीवन शैली से उत्पन्न चुनौतियों के प्रति जागरुक करते हुए। उन्हें सकारात्मक एवं संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित किया गया। डिप्रेशन, एंजायटी एवं नशे से जुड़े मानसिक रोगों पर द्विपक्षीय वार्ता की गई, जिसमें छात्र-छात्राओं से मानसिक रोगों के बारे में पूछा गया एवं छात्र-छात्राओं में मानसिक रोगों के प्रति जागरूकता हेतु अत्यधिक उत्सुकता देखने को मिली।
महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में 12 मार्च 2026 से सप्ताहिक जागरूकता कार्यक्रम में सभी छात्र-छात्राओं से टेली-मानस नंबर 14416 साझा किये जा रहे हैं। जिले में टेली-मानस नंबर 14416 के सबसे ज्यादा परामर्श होने के पीछे मेडिकल कॉलेज के साप्ताहिक कार्यक्रम का विशेष योगदान रहा है। यह भी बताया गया कि सही समय पर मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त करना मानसिक मजबूती का प्रतीक है।
सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से दूर रहना एवं वास्तविक जीवन में सामाजिक जुड़ाव बनाए रखने के लिए सभी को प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ मानसिकता ही सफल जीवन और स्वस्थ समाज की आधारशिला है। निरंतर संवाद एवं सलाह, सकारात्मक सोच तथा एक दूसरे का सहयोग मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के आयोजन में मेडिकल कॉलेज से टीचर एसोसिएशन का महत्वपूर्ण योगदान रहा।




