अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर (प्रमोद वर्मा)। जनपद के अकबरपुर में यातायात व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। पीआरडी जवान अजय कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर यातायात सुरक्षा प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि नो-एंट्री के नियमों को ताक पर रखकर निजी बसों को शहर के अंदर प्रवेश दिया जा रहा है, जिसके एवज में कथित तौर पर प्रतिमाह छह हजार रुपये वसूले जा रहे हैं।
शिकायतकर्ता पीआरडी जवान अजय कुमार वर्मा की ड्यूटी अन्नावां बाजार में यातायात व्यवस्था संभालने के लिए लगाई गई थी। उनका आरोप है कि नियमों के विपरीत निजी बसों को अंदर जाने की खुली छूट दी जाती है। जब ड्यूटी पर तैनात जवान इन बसों को रोकते हैं, तो चालक यातायात सुरक्षा प्रभारी जय बहादुर यादव से फोन पर बात कराते हैं, जिसके बाद बसों को जाने का निर्देश दिया जाता है।
आरोप है कि दोपहर एक बजे से ढाई बजे और शाम साढ़े तीन बजे से रात आठ बजे तक इन बसों का बेरोक-टोक संचालन होता है। विरोध करने पर यह कहकर दबाव बनाया जाता है कि संबंधित वाहन किसी पत्रकार का है, इसलिए उसे जाने दिया जाए। इसके अलावा, यातायात सुरक्षा बल में तैनात एक अन्य कर्मी अच्छेलाल यादव पर भी रुपये लेकर बसें चलवाने और विरोध करने पर ड्यूटी अन्यत्र शिफ्ट कराने की धमकी देने के आरोप लगे हैं।
क्षेत्र में निजी बसों के इस तरह अवैध संचालन को लेकर पहले भी चर्चाएं होती रही हैं। इस पूरे प्रकरण में कई सवाल खड़े होते हैं क्या जिम्मेदार अधिकारियों की नजरों से यह अवैध संचालन छिपा हुआ था? यातायात सुरक्षा प्रभारी का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद उन्हें इस पद पर क्यों बनाए रखा गया है? क्या पुलिस अधीक्षक कार्यालय में इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए अन्य योग्य कर्मियों की कमी है?
सीसीटीवी फुटेज से खुलेगी सच्चाई
मामले की तह तक जाने के लिए अन्नावां बाजार में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की मांग की गई है। यदि सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर और आवागमन के समय की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो पूरे खेल का पर्दाफाश हो सकता है।
इस संबंध में यातायात सुरक्षा प्रभारी जय बहादुर यादव का पक्ष जानने के लिए कई बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। उनका पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर का हिस्सा बनाया जाएगा। फिलहाल, लगाए गए गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, और अब सबकी निगाहें उच्चाधिकारियों द्वारा की जाने वाली निष्पक्ष जांच पर टिकी हैं।


