अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकर नगर। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित देशव्यापी कार्यक्रम “खेत बचाओ अभियान” रबी वर्ष 2026 के अंतर्गत आज ग्राम बाला पकोली विकास खंड भीटी जनपद अम्बेडकर नगर में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय ग्राम प्रधान ने की। कार्यक्रम में किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में शस्य वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार कनौजिया ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मृदा की उर्वरता बनाए रखने, फसलों की उत्पादकता बढ़ाने तथा खेती की लागत कम करने के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मिट्टी केवल फसल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि कृषि की आधारशिला है। इसलिए इसकी सेहत एवं उर्वरता को बनाए रखना प्रत्येक किसान की जिम्मेदारी है।
डॉ. कनौजिया ने किसानों को सलाह दी कि वे अपनी खेत की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं तथा मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करें। इसके साथ ही गोबर की अच्छी तरह सड़ी खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद एवं जैव उर्वरकों का समुचित उपयोग करें, जिससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ एवं कार्बनिक कार्बन की मात्रा बढ़ाई जा सके।
उन्होंने बताया कि फसलों की समुचित वृद्धि एवं बेहतर उत्पादन के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश के साथ-साथ सल्फर, जिंक एवं बोरॉन जैसे द्वितीयक एवं सूक्ष्म पोषक तत्व भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से सरसों जैसी तिलहनी फसलों में सल्फर का संतुलित उपयोग बेहतर उत्पादन एवं गुणवत्ता के लिए आवश्यक है। उन्होंने किसानों को फसल की आवश्यकता एवं मृदा परीक्षण के आधार पर पोषक तत्वों का प्रयोग करने तथा उर्वरकों के अनावश्यक एवं असंतुलित उपयोग से बचने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि समेकित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने से मृदा स्वास्थ्य में सुधार, उर्वरकों की उपयोग दक्षता में वृद्धि, उत्पादन लागत में कमी, पर्यावरण संरक्षण तथा दीर्घकालीन टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलता है। किसानों को फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करने, फसल चक्र में दलहनी फसलों को शामिल करने तथा हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भी प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को वैज्ञानिक खेती की नवीन तकनीकों को अपनाने तथा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से नियमित तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण, हरियाली संवर्धन एवं प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला अम्बेडकर नगर के इंचार्ज तथा कृषि विभाग भीटी के कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में लगभग 90 पुरूष एवं महिला कृषिकों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी किसानों से अपील की गई कि वे “स्वस्थ मिट्टी, समृद्ध किसान और टिकाऊ कृषि” के संकल्प के साथ खेतों की उर्वरता एवं पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
प्रमुख संदेश:
“मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, खेती बचेगी तो किसान बचेगा।”




