टैक्स बचाने को वाहन मालिक प्राइवेट रजिस्ट्रेशन करा कर रहे कॉमर्शियल इस्तेमाल

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कम पैसे में प्राइवेट वाहन का फिटनेस और टैक्स 15 वर्ष के लिए होता है जमा

अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकरनगर।
निजी वाहनों के व्यावसायिक उपयोग पर कानूनी रोक है इसके बाद भी जिले में निजी वाहनों का व्यावसायिक वाहनों के रूप में बेरोक-टोक उपयोग हो रहा है। जबकि ऐसा करने वालों पर आर्थिक जुर्माने के साथ जेल की सजा का भी प्रावधान है। शहर-देहात की सडक़ों पर खुलेआम कार, जीप व लग्जरी वाहन किराए पर चल रहे हैं, मगर इनकी सख्त जांच नहीं की जाती।

इसी कारण हर कोई निजी वाहन को ही व्यावसायिक वाहन के रूप में उपयोग में ले रहा है। जिसकी वजह से टैक्स चुकाने वालों की श्रेणी में आने वाले लोग भी बिना टैक्स चुकाए वाहन दौड़ा रहे हैं।वाहन मालिकों ने इन वाहनों का वन टाइम टैक्स जमा किया है। जिले में ऐसे वाहनों से टैक्स की चोरी छिपाकर कर नहीं बल्कि शहर के प्रमुख सड़क दोस्तपुर मार्ग पर सफेद नंबर वाली कार व अन्य यात्री वाहनों को सवारी का इंतजार करते खुलेआम देखा जा सकता है।

ऐसे सफेद प्लेट नंबर वाले वाहनों का इस्तेमाल किराये पर न केवल सामान्य यात्री करते हैं, बल्कि कई ऐसे सरकारी विभाग भी हैं जो निजी पंजीकृत वाहन व्यावसायिक उपयोग में कर रहे हैं।परिवहन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार टैक्सी परमिट के लिए नये वाहन को दो वर्ष बाद प्रत्येक वर्ष फिटनेस प्रमाण पत्र देना होता है। साथ ही कामर्शियल वाहन को प्रतिवर्ष 700 रुपये टैक्स भी जमा करने का प्रावधान है, लेकिन ऐसा होने से सरकार को प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है।

क्या है नियम

वाहन कामर्शियल या निजी उपयोग के लिए खरीदा जा रहा है यह तय करने के बाद रजिट्रेशन कराना होता है। वाहन के निजी उपयोग के लिए प्राइवेट रजिट्रेशन करना होता है। इसके लिए वन टाइम टैक्स जमा होता है। वाहन चाहे छोटा ही क्यों न हो, यदि उसका व्यावसायिक उपयोग हो रहा है तो परिवहन विभाग से कामर्शियल रजिस्ट्रेशन होता है। इसके लिए टैक्स जमा करना होता है। यह गाड़ी की मूल्य पर निर्भर करता है।

क्या है प्रावधान

मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार प्राइवेट रजिस्ट्रेशन वाले वाहन के कामर्शियल उपयोग पर प्रतिबंध है। ऐसा करनेवालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ ही आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।

एमवीआइ एक्ट के अनुसार, पहली बार गलती पाए जाने पर 5000 रुपये जुर्माना व तीन साल की सजा, दूसरी बार गलती पाए जाने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना व एक साल की सजा हो सकती है। वाहन को भी जब्त करने का प्रावधान है। इस संदर्भ में जिला परिवहन अधिकारी सत्येंद्र यादव से फोन पर बात करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।


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