अम्बेडकर नगर, संवाददाता।
विकासखंड रामनगर के अंतर्गत आने वाले ग्रामसभा सुल्तानपुर कबीरपुर में सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। महज़ दो वर्ष पूर्व निर्मित पंचायत भवन आज दरारों और टूटते प्लास्टर की कहानी कह रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरती गई है, जिससे भवन की दीवारें अब से ही झड़ने लगी हैं।
निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत सुल्तानपुर कबीरपुर में पंचायत भवन का निर्माण लगभग दो वर्ष पहले कराया गया था। लेकिन अब भवन की सीमेंट परत उखड़ने लगी है तथा कई जगह प्लास्टर झड़कर गिर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के समय घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया था। यही वजह है कि भवन टिकाऊ नहीं रह सका।

भवन का पिछला हिस्सा अब भी अधूरा और बिना प्लास्टर का है। इससे प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य को जल्दबाज़ी में पूरा दिखा दिया गया था।
बिजली कनेक्शन नहीं, फिर भी चलता है काम
भवन में अब तक बिजली का स्थायी कनेक्शन नहीं कराया गया, इसके बावजूद पंचायत से संबंधित सभी कामकाज वहीं होते हैं। जब इस विषय पर ग्राम प्रधान से बात की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि “जरूरत पड़ने पर कटिया के माध्यम से बिजली ली जाती है, क्योंकि ग्राम पंचायत का बजट सीमित है।”
इस बयान से ग्रामीणों में नाराज़गी है। उनका कहना है कि अगर बिजली विभाग की अनुमति के बिना कटिया लगाई जा रही है, तो यह सीधी विद्युत चोरी है और अधिकारियों को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।
बंद मिला पंचायत भवन, हैंडपंप निष्क्रिय
स्थानीय लोगों के अनुसार बुधवार को करीब दोपहर 2 बजे पंचायत भवन बंद पाया गया। भवन के बाहर “प्रधान कक्ष” और “कंप्यूटर कक्ष” के बोर्ड तो लगे हैं, लेकिन “सचिव कक्ष” का बोर्ड नहीं लगाया गया है।
इसके अलावा पंचायत भवन परिसर में स्थापित हैंडपंप भी खराब पड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि हैंडपंप की मरम्मत और जलापूर्ति योजनाओं के नाम पर हर वर्ष राशि निकलती है, फिर भी पानी की व्यवस्था नहीं हो पाती।
ग्रामीणों ने जांच की मांग की
ग्रामवासियों का कहना है कि पंचायत भवन का निर्माण पारदर्शी तरीके से नहीं कराया गया और न ही कार्य की गुणवत्ता की किसी विभागीय अधिकारी ने समय-समय पर जांच की। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार, ग्राम प्रधान एवं सचिव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
अधिकारियों की निगरानी पर भी सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग के अधिकारी क्षेत्र में नियमित रूप से निरीक्षण नहीं करते, जिसके चलते विद्युत चोरी जैसी गतिविधियाँ खुलकर चल रही हैं। साथ ही, पंचायत भवन जैसी महत्वपूर्ण संरचना की दशा देखकर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
