अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर (प्रमोद वर्मा)।
जनपद में पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्पष्ट घटनाओं, पुख्ता साक्ष्यों और न्यायालय के आदेशों के बावजूद पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि आम नागरिक के लिए थाना-कचहरी के चक्कर लगाना मजबूरी बन गया है।
मारपीट के मामलों में वीडियो साक्ष्य सामने आने के बाद भी पुलिस द्वारा दोनों पक्षों से कथित तौर पर लेन-देन कर क्रॉस मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। कई मामलों में न्यायालय के स्थगन आदेशों का पालन नहीं कराया जा रहा, जिससे पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। पुलिस की मौजूदगी में बिना समुचित जांच के गलत व्यक्ति का मकान गिराए जाने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
इससे न केवल पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं, बल्कि न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता भी प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि थानों व चौकियों पर वर्षों से जमे पुलिसकर्मी और प्रभारी इस अव्यवस्था की जड़ हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती के चलते कथित दलाल नेटवर्क मजबूत हुआ है, जिसके कारण पीड़ितों की सुनवाई नहीं हो पा रही है।
सामाजिक संगठनों व जागरूक नागरिकों ने उच्चाधिकारियों से तत्काल स्थानांतरण, निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई की मांग की है। अब निगाहें जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे हालात सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।
