अवधी खबर संवाददाता
कप्तानगंज, बस्ती। विकासखण्ड कप्तानगंज में तैनात सचिव रजनी दूबे की कार्यशैली इन दिनों सवालों के घेरे में है। आरोप है कि वह ग्राम पंचायतों में स्थापित सरकारी कम्प्यूटर सिस्टम को दरकिनार कर प्राइवेट दुकानों और मनचाहे फर्मों के माध्यम से सरकारी धन का भुगतान कर रही हैं। इससे न केवल शासनादेश की अनदेखी हो रही है, बल्कि पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों में पंचायत भवनों को सुसज्जित करने के लिए कम्प्यूटर सिस्टम, इन्वर्टर, सोलर पैनल, फर्नीचर और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीद के लिए धन आवंटित किया था। अधिकांश पंचायतों में यह व्यवस्था स्थापित भी कर दी गई है। साथ ही, शासन स्तर से यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि विकास कार्यों से संबंधित भुगतान पंचायत भवनों पर तैनात पंचायत सहायकों द्वारा कम्प्यूटर सिस्टम के माध्यम से किया जाए।
इसके बावजूद आरोप है कि सचिव रजनी दूबे इन नियमों को दरकिनार कर निजी दुकानों के जरिए भुगतान कर रही हैं। इससे पंचायत सहायकों के अधिकारों का हनन हो रहा है और उन्हें यह तक जानकारी नहीं रहती कि पंचायत में कितना बजट आया, कितना खर्च हुआ और कितना शेष है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि संबंधित सचिव न तो ब्लॉक मुख्यालय पर नियमित रूप से बैठती हैं और न ही पंचायत भवनों पर उपस्थित रहती हैं। आरोप है कि वह घर बैठे मोबाइल फोन के जरिए भुगतान से संबंधित विवरण प्राइवेट दुकानदारों को भेजती हैं, जिसके आधार पर कथित रूप से फर्जी भुगतान कर धन का बंदरबांट किया जा रहा है।
इस पूरी स्थिति का असर पंचायत भवनों पर साफ देखा जा सकता है, जहां लाखों रुपये की लागत से लगाए गए कम्प्यूटर सिस्टम धूल फांक रहे हैं और उपयोग के अभाव में खराब होने की कगार पर हैं।
स्थानीय लोगों में इस मामले को लेकर आक्रोश व्याप्त है और वे जिम्मेदार अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है।




