चिकित्सा शिक्षा में उत्कृष्टता की दिशा में एक और सशक्त कदम
अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज, में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के दिशा-निर्देशों एवं अनुमोदन के अनुरूप 3 दिवसीय Basic Course in Medical Education (BCME) प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन 7 से 9 मई 2026 तक किया गया। यह प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रम नोडल सेंटर, लखनऊ के तत्वावधान में तथा NMC समन्वयक डॉ0 राकेश कुमार दीवान के पर्यवेक्षण में सम्पन्न हुआ।
राष्ट्रीय स्तर पर अनिवार्य इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षकों को आधुनिक, छात्र-केंद्रित एवं दक्षता-आधारित शिक्षण पद्धतियों से सशक्त बनाकर चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक प्रभावी बनाना है।
यह उल्लेखनीय है कि महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज के इतिहास में यह द्वितीय BCME प्रशिक्षण कार्यक्रम है। इससे पूर्व प्रथम BCME प्रशिक्षण कार्यक्रम 3 से 5 दिसंबर 2025 तक सफलतापूर्वक आयोजित किया गया था।
अल्प समयावधि में दूसरी बार इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन संस्थान की शैक्षणिक प्रतिबद्धता, दूरदर्शी नेतृत्व तथा चिकित्सा शिक्षा में निरंतर गुणवत्ता सुधार के प्रति गंभीर प्रयासों का सशक्त प्रमाण है। यह उपलब्धि महाविद्यालय को प्रदेश के उन अग्रणी संस्थानों की श्रेणी में स्थापित करती है, जो संकाय विकास एवं चिकित्सा शिक्षा के आधुनिकीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के 30 चिकित्सा शिक्षकों ने सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता की। प्रतिभागियों ने पूरे समर्पण, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा के साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम का संपूर्ण संचालन एवं सफल पर्यवेक्षण महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ0 मुकेश यादव तथा मेडिकल एजुकेशन यूनिट (MEU) समन्वयक डॉ0 मुकेश राना के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ शिक्षाविदों ने चिकित्सा शिक्षा के बदलते परिदृश्य, Competency-Based Medical Education (CBME) की प्रासंगिकता, NMC द्वारा निर्धारित अद्यतन शैक्षणिक मानकों तथा शिक्षक प्रशिक्षण की अनिवार्यता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि आज के चिकित्सा शिक्षक की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को नैदानिक दक्षता, नैतिक मूल्यों, संवाद कौशल और व्यावसायिक व्यवहार से भी सशक्त बनाना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन Medical Education Unit एवं Curriculum Committee के अनुभवी संकाय सदस्यों द्वारा किया गया, जिनमें उप-प्रधानाचार्य डॉ0 उमेश कुमार वर्मा, डॉ0 अजय कुमार सिंह, डॉ0 बीरेन्द्र यादव, डॉ0 अजफर मतीन, डॉ0 रीतेश कुमार राय, डॉ0 बृजेश कुमार, डॉ0 अमित कुमार पटेल, डॉ0 मनोज कुमार गुप्ता, डॉ0 राजेश गौतम, विशेष कुमार एवं लिपिक अभिषेक, आशीष तथा फोटोग्राफर प्रमोद कुमार सहित अन्य का सराहनीय योगदान रहा। कार्यक्रम को केवल व्याख्यान-आधारित न रखकर पूर्णतः सहभागितापूर्ण, अनुभवात्मक एवं व्यवहारिक स्वरूप प्रदान किया गया, जिससे प्रतिभागियों को शिक्षण-अधिगम की आधुनिक अवधारणाओं का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हो सके। प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रतिभागियों को समूह गतिविधियाँ, केस-आधारित शिक्षण (Case-Based Learning), भूमिका निर्वाह (Role Play), माइक्रोटिचिंग, कौशल प्रदर्शन, Skill Lab आधारित शिक्षण, फॉर्मेटिव असेसमेंट, समग्र मूल्यांकन तकनीक, प्रभावी फीडबैक एवं रिफ्लेक्टिव लर्निंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
विशेष रूप से Skill Lab आधारित सत्र प्रतिभागियों के लिए अत्यंत प्रभावशाली एवं उपयोगी सिद्ध हुए। इन सत्रों में शिक्षकों को वास्तविक नैदानिक परिस्थितियों का अनुकरण करते हुए कौशलों का अभ्यास, प्रदर्शन एवं मूल्यांकन करने का व्यवहारिक अवसर मिला। प्रतिभागियों ने इन सत्रों को अत्यंत नवाचारी, प्रासंगिक एवं शिक्षण कौशल संवर्धन के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।
समापन सत्र में प्रतिभागी शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उनके शिक्षण दृष्टिकोण, कक्षा प्रबंधन क्षमता, संवाद कौशल, मूल्यांकन दक्षता तथा छात्र सहभागिता बढ़ाने की क्षमता को सुदृढ़ करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुआ है। कई प्रतिभागियों ने इसे अपने व्यावसायिक विकास के लिए परिवर्तनकारी अनुभव बताया।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य डॉ0 मुकेश यादव ने सभी प्रतिभागियों, संसाधन व्यक्तियों एवं आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा, “राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मार्गदर्शन में आयोजित ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा देते हैं। प्रशिक्षित शिक्षक ही सक्षम, संवेदनशील एवं दक्ष भावी चिकित्सकों के निर्माण की आधारशिला होते हैं। महामाया मेडिकल कॉलेज इस दिशा में निरंतर प्रतिबद्ध है।”
MEU समन्वयक डॉ0 मुकेश राना ने कार्यक्रम की सफलता का श्रेय समस्त आयोजन टीम के समर्पण, समन्वय एवं उत्कृष्ट टीमवर्क को देते हुए बताया कि महाविद्यालय में अब तक 100 प्रतिशत आचार्यों एवं सह-आचार्यों तथा 83 प्रतिशत सहायक आचार्यों का BCME प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कराया जा चुका है, जो संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल संस्थान में शिक्षण गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ करेगी।
महाविद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के सतत संकाय विकास कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षक न केवल अपनी शिक्षण दक्षताओं को परिष्कृत करेंगे, बल्कि विद्यार्थियों को अधिक प्रभावी, व्यवस्थित, नवाचारपूर्ण, विद्यार्थी-केंद्रित एवं दक्षता- आधारित चिकित्सा शिक्षा प्रदान करने में भी और अधिक सक्षम बनेंगे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संस्थान की गुणवत्ता, नवाचार एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।




