रिकॉर्ड मतों से जीते मरहरा के प्रधान पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल’ ने खोली पोल

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वित्तीय अनियमितता: ₹2.46 लाख के नाली निर्माण में गायब मिले बिल-वाउचर

हाईटेक हेराफेरी! अप्रैल 2026 के वाउचरों को किया गया पासवर्ड लॉक आम जनता के लिए देखना असंभव

अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकरनगर।
जनपद के विकास खंड भियावं अंतर्गत आने वाली मरहरा ग्राम पंचायत इन दिनों भारी वित्तीय अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा के केंद्र में है। पंचायत चुनाव में रिकॉर्ड मतों से ऐतिहासिक विजय हासिल करने वाले ग्राम प्रधान की कार्यप्रणाली अब ‘ई-ग्राम स्वराज पोर्टल’ पर सामने आई तकनीकी और वित्तीय गड़बड़ियों के बाद जांच के घेरे में आ गई है।

आरोप है कि ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव ने आपसी सांठगांठ से सरकारी धन के उपयोग में घोर अनियमितता बरती है, जिससे शासन की पारदर्शिता व्यवस्था केवल कागजों तक सिमट कर रह गई है।


मीडिया पड़ताल और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, फरवरी 2025 से अप्रैल 2026 के मध्य विकास कार्यों के नाम पर कई ऐसे भुगतान किए गए हैं, जिनके बिल-वाउचर या तो पोर्टल पर अपलोड ही नहीं हैं, या फिर उन्हें ऐसे स्वरूप में डाला गया है जिसे देखा नहीं जा सकता।


विवरण के अनुसार, फरवरी 2025 में ‘नाली निर्माण’ कार्य के लिए विभिन्न फर्मों को ₹2,46,965 का भुगतान दर्शाया गया है, लेकिन जब संबंधित बिल और वाउचर की जांच की गई, तो जरूरी दस्तावेज नदारद मिले।
मामले में सबसे गंभीर मोड़ अप्रैल 2026 के वाउचरों को लेकर आया है। आरोप है कि जांच से बचने और जनता की नजरों से छिपाने के लिए इन डिजिटल फाइलों को जानबूझकर पासवर्ड-प्रोटेक्टेड कर दिया गया है।

पोर्टल पर इन फाइलों को खोलने का प्रयास करने पर स्क्रीन पर This file is protected का संदेश दिखाई देता है। वहीं, फरवरी और मार्च 2026 के कई वाउचरों को क्लिक करने पर File does not exist प्रदर्शित हो रहा है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने इस पूरी कार्यप्रणाली को ‘अंधा बिल’ और ‘भूतिया बिल’ की संज्ञा दी है।

इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल ग्राम पंचायत प्रशासन, बल्कि विकास खंड और पंचायती राज विभाग की निगरानी प्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि ब्लॉक स्तर से नियमित ऑडिट, सोशल ऑडिट और तकनीकी सत्यापन सही ढंग से कराया गया होता, तो इस प्रकार की गड़बड़ियों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता था।


मामला उजागर होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर जिन फाइलों को लॉक अथवा गायब किया गया है, उनकी गहनता से जांच कर जवाबदेही तय की जाए और दोषियों के खिलाफ तत्काल विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाए।


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