फिर सक्रिय हुआ पुराना खेल, पुलिस-आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल
अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर (प्रमोद वर्मा)। जनपद में शराब के ठेकों के आसपास अवैध रूप से संचालित हो रही चखना दुकानों का कारोबार एक बार फिर चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन दुकानों की आड़ में देर रात तक शराबखोरी, मारपीट, गाली-गलौज और असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। कई स्थानों पर यह इलाका अब अपराध और अव्यवस्था का केंद्र बनता जा रहा है।
जानकारों की मानें तो पूर्व पुलिस अधीक्षक केशव प्रसाद के कार्यकाल में ऐसे अवैध चखना ठिकानों पर सख्त कार्रवाई हुई थी। उस दौरान कई दुकानों को हटाया गया और शराब ठेकों के आसपास लगने वाली भीड़ पर नियंत्रण किया गया था। लेकिन समय बीतने के साथ एक बार फिर वही स्थिति लौटती दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम होते ही कई शराब ठेकों के आसपास खुलेआम चखना दुकानें सज जाती हैं, जहां शराब पीने वालों की भीड़ जुटती है। इससे महिलाओं और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई जगहों पर आए दिन विवाद, छीना-झपटी और मारपीट जैसी घटनाएं भी सामने आती रहती हैं।
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इन अवैध चखना दुकानों को संरक्षण कौन दे रहा है? क्या यह धंधा पुलिस विभाग और आबकारी विभाग की मिलीभगत से चल रहा है? क्योंकि बिना प्रशासनिक संरक्षण के इस प्रकार खुलेआम अवैध कारोबार का संचालन संभव नहीं माना जा रहा।
सूत्रों की मानें तो कुछ स्थानों पर ठेके के आसपास अस्थायी टीनशेड और प्लास्टिक की दुकानों में चखना बेचने के साथ खुलेआम शराब परोसने का भी काम किया जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार शराब ठेकों के आसपास इस प्रकार की गतिविधियां प्रतिबंधित मानी जाती हैं।
जनता अब प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले समय में अपराध और कानून व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है।



