लाइसेंस रद्द होने के बावजूद , फिर भी धड़ल्ले से डायग्नोस्टिक सेंटर संचालन!

Spread the love

सीएमओ बोले- मशीनें जमा करो, सेंटर बोले- पहले पकड़ तो लो! अब एसडीएम की जांच पर टिकी जिले की नजर

अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकरनगर।
सरकारी आदेशों की किस्मत भी अजीब होती है। कुछ आदेश फाइलों में दम तोड़ देते हैं, कुछ नोटिस बोर्ड तक पहुंचकर शहीद हो जाते हैं, और कुछ ऐसे होते हैं जो जारी तो हो जाते हैं लेकिन जिनके सामने संबंधित लोग ऐसा व्यवहार करते हैं मानो वे केवल सुझाव हों। बसखारी क्षेत्र के लक्ष्मी डायग्नोस्टिक सेंटर और प्रांजल डायग्नोस्टिक सेंटर का मामला कुछ ऐसा ही दिखाई पड़ रहा है। मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर हुई शिकायतों के बाद सामने आए स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेजों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

विभागीय अभिलेख बताते हैं कि एक केंद्र का पंजीकरण निरस्त किया जा चुका है और अल्ट्रासाउंड मशीनों को को कितना प्रशिक्षित डॉक्टर के खुले आम चलाई जा रही है । और कथित रूप से सेंटर भी अपनी जगह चल रहा है।
अब सवाल यह है कि यदि पंजीकरण समाप्त था तो संचालन किस भरोसे पर हो रहा था? क्या सरकारी आदेश रास्ता भटक गए थे, या फिर किसी अदृश्य सुरक्षा कवच ने उन्हें प्रभावशाली बना दिया है?


मामले ने नया मोड़ तब लिया जब शिकायत जांच 11 जून को सीएचसी प्रभारी अजय कुमार बसखारी की संयुक्त जांच टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। उम्मीद थी कि अभिलेख खुलेंगे, दस्तावेज सामने आएंगे और जांच आगे बढ़ेगी। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार जांच टीम को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। न आवश्यक दस्तावेज मिले और न ही वह जानकारी, जिसकी तलाश में टीम पहुंची थी।

और सीएससी अधीक्षक बसखारी की जांच टीम उल्टे पांव वापस चलीआई नतीजा यह रहा कि जांच के सवाल वहीं खड़े रहे और जवाब कहीं दिखाई नहीं दिए। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक लेटर के माध्यम से जांच करने में सहयोग मांगा मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने उपजिलाधिकारी टांडा को विस्तृत जांच का जिम्मा सौंप दिया है। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, पीसीपीएनडीटी प्राधिकारी और थाना बसखारी को भी पत्र भेजकर कार्रवाई में सहयोग मांगा गया है।

अब प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि यदि आरोप सही साबित हुए तो डायग्नोस्टिक सेंटर सील क्यों नहीं किए गए या फिर पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत आपराधिक कार्रवाई की तलवार क्यों नहीं लटका। इधर इस प्रकरण की चर्चा अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि जिले में एक और सवाल हवा में तूल पकड़ने लगा। विभिन्न निजी अस्पतालों, पैथोलॉजी लैबों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में कथित रूप से एक ही चिकित्सक डॉ. ओपी त्रिपाठी का नाम और डिग्रियां प्रदर्शित होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर डॉक्टर साहब की सेवाएं कितने संस्थानों में उपलब्ध हैं और उनका नाम कितने बोर्डों की शोभा बढ़ा रहा है।

जनता की मांग अब केवल दो डायग्नोस्टिक सेंटरों तक सीमित नहीं रही। लोगों का कहना है कि जिले में संचालित निजी स्वास्थ्य संस्थानों के अभिलेख, चिकित्सकों की वास्तविक तैनाती और प्रदर्शित डिग्रियों की भी व्यापक जांच होनी चाहिए। क्योंकि जब एक मामले का पर्दा उठता है, तो अक्सर उसके पीछे कई और परतें दिखाई देने लगती हैं।


फिलहाल जिले की निगाहें एसडीएम टांडा की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह जांच अब केवल दो डायग्नोस्टिक सेंटरों का मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी आदेशों की वास्तविक ताकत की भी परीक्षा बन चुकी है। अब देखना यह है कि जांच रिपोर्ट में सच्चाई का अल्ट्रासाउंड होता है या फिर फाइलों का एक्स-रे करके मामला अगले पड़ाव तक पहुंचा दिया जाता है।


Spread the love

Related Posts

सुरेन्द्र वर्मा के नेतृत्व में निकली पीडीए जनजागरण साइकिल यात्रा, भाजपा सरकार पर साधा निशाना

Spread the love

Spread the loveसपा जिलाध्यक्ष जंगबहादुर यादव ने साइकिल चलाकर यात्रा का शुभारंभ किया अवधी खबर संवाददाता अम्बेडकरनगर। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के मद्देनजर समाजवादी पार्टी ने जनसंपर्क गतिविधियां…


Spread the love

छात्राओं को सिखाए सुरक्षा के उपाय, पेन बांटकर हेल्पलाइन नंबरों की दी जानकारी

Spread the love

Spread the loveडॉ. राम मनोहर लोहिया इंटर कॉलेज सेमरी में एंटी रोमियो टीम ने चलाया जागरूकता अभियान, कहा-छेड़खानी या उत्पीड़न होने पर चुप न रहें, तत्काल पुलिस को दें सूचना…


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *