मनरेगा घोटाले का पर्दाफाश! कागजी विकास की भेंट चढ़ा सरकारी खजाना, बेनीपुर में चल रहा फर्जीवाड़े का खेल

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कागजों में ही चक मार्ग का निर्माण कार्य कर सरकारी धन की खुलेआम चल रही लूट का प्रयास

प्रमोद वर्मा

अम्बेडकरनगर(अवधी खबर)। सूबे की योगी सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाए जाने के बावजूद धरातल पर भ्रष्ट तंत्र अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहा है। जिले के कटेहरी विकासखंड अंतर्गत बेनीपुर ग्राम सभा में मनरेगा योजना के तहत हो रहे घोर भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है। यहाँ बिना एक फावड़ा चलाए, कागजों में चक मार्ग का निर्माण कर सरकारी धन को खुलेआम लूटा जा रहा है।

मीडिया टीम द्वारा की गई जमीनी पड़ताल में जो सच्चाई सामने आई है, वह सरकारी दावों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। ग्राम पंचायत बेनीपुर में रमेश यादव के खेत से सूर्यकांत के खेत तक चक मार्ग निर्माण का कार्य दिखाया जा रहा है। सरकारी रिकॉर्ड और मनरेगा पोर्टल के अनुसार, यह काम पिछले करीब एक सप्ताह से जोर-शोर से चल रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि हर दिन कार्यस्थल से मजदूरों की फोटो खींचकर फर्जी तरीके से ऑनलाइन हाजिरी भी पोर्टल पर अपलोड की जा रही है।

सोमवार को जब मीडिया की टीम ने मौके पर जाकर वस्तुस्थिति देखी, तो वहां कोई निर्माण कार्य होता नहीं मिला। जिस चक मार्ग पर काम के नाम पर मनरेगा मजदूर लगाकर सरकारी खजाने से पैसे निकालने का प्रयास किया जा रहा हैं, वहां खुदाई का एक अंश भी दिखाई नहीं पड़ा। मौके पर न तो कोई मजदूर मौजूद था और न ही वहां निर्माण संबंधी एक चुटकी मिट्ठी दिखाई दिया। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि पूरी प्रक्रिया सिर्फ कागजों में सिमटी हुई है और केवल सरकारी धन की निकासी के लिए फर्जी फोटो का सहारा लिया जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा स्थानीय स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। करीब एक सप्ताह से चल रहे इस खेल को तकनीकी सहायकों और संबंधित सचिव ने कैसे नजरअंदाज किया? यदि अधिकारी मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करते, तो यह भ्रष्टाचार प्रथम दृष्टया ही पकड़ा जाता।

बेनीपुर गांव में केवल इसी कार्य में नहीं, बल्कि अन्य विकास कार्यों में भी बड़े स्तर पर धन के बंदरबांट की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गांव में मनरेगा के तहत हुए पिछले एक साल के सभी कार्यों की उच्च स्तरीय जांच हो।
फर्जी हाजिरी अपलोड करने वाले दोषियों और इसकी अनदेखी करने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों पर कार्यवाही की जाए। बिना काम कराए सरकारी धन निकालने वालों से रिकवरी सुनिश्चित की जाए।

यह मामला महज एक सड़क के निर्माण का नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है जो भ्रष्टाचार को पोषण दे रही है। यदि समय रहते इस फर्जीवाड़े पर लगाम नहीं लगाई गई, तो गरीब मजदूरों का हक मारने वाले ये भ्रष्ट तत्व और अधिक हौसले के साथ सरकारी खजाने को चूना लगाते रहेंगे।

वही जब इस संबंध में खंड विकास अधिकारी कटेहरी राजेंद्र कुमार तिवारी से वार्ता करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं रिसीव हो सका।

     अगले अंक में आगे की खबर.....…...


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