महिला के अंतिम संस्कार के दौरान घर में खड़ी कार में आग लगाने के मामले में 22 नामजद समेत 20 अज्ञात पर दर्ज हुआ था मुकदमा, ग्रामीण बोले – फर्जी मुकदमे में बिना जांच के फंसाया गया, मृत व्यक्ति को भी बनाया गया आरोपी
अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। भीटी थाना क्षेत्र के बनखोदवा गांव में महिला के अंतिम संस्कार के दौरान कार में आग लगाए जाने के मामले में दर्ज मुकदमे की विवेचना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर मामले की जांच क्षेत्राधिकारी भीटी से कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि कार में आग लगाने की घटना में किसकी भूमिका थी, यह अब तक स्पष्ट खुलासा नहीं है, लेकिन 22 नामजद समेत 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। ग्रामीणों का दावा है की इस मुकदमे में ऐसे लोगों को भी आरोपी बनाया गया है, जिनका घटना से कोई संबंध नहीं है। यहां तक की करीब दो वर्ष पहले मृत्यु हो चुके महेश कुमार निषाद का नाम भी मुकदमे में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, 14 अक्टूबर को महिला सुषमा उर्फ गुड़िया के अंतिम संस्कार के दौरान आरोपी राजेश निषाद के घर के अंदर खड़ी स्विफ्ट डिजायर कार में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग गई थी। इस मामले में राजेश निषाद के पुत्र अमन निषाद की तहरीर पर पुलिस ने 22 नामजद और 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। अब ग्रामीण इस मुकदमे की विवेचना पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि घटना में उनकी संलिप्तता के स्पष्ट साक्ष्य सामने आए बिना उन्हें आरोपी बना दिया गया है।
पुलिस अधीक्षक को दिए गए शिकायती पत्र में ग्रामीणों ने आरोप लगाया की भीटी थाने में दर्ज मुकदमे की विवेचना निष्पक्ष तरीके से नहीं की जा रही है। उनका दावा है कि मुकदमे में सामाजिक कार्यकर्ताओं और रोजी-रोटी के सिलसिले में दूसरे जनपदों में रहने वाले लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। ग्रामीणों ने महेश कुमार निषाद का नाम भी मुकदमे में शामिल होने पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी मृत्यु करीब दो वर्ष पहले हो चुकी है। ऐसे में मुकदमे में नाम शामिल किए जाने की परिस्थितियों की जांच जरूरी है।
ग्रामीणों का कहना है कि कार में आग किसने लगाई, इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि घटना के वास्तविक तथ्यों और साक्ष्यों की पड़ताल किए बिना लोगों को मुकदमे में फंसाया जा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मुकदमे की विवेचना को लेकर सवाल उठाने पर उन्हें पुलिस की दबिश, धमकी और कथित प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। इससे परिवारों में भय का माहौल होने का दावा करते हुए उन्होंने पुलिस अधीक्षक से हस्तक्षेप करने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने की मांग की है।
शिकायती पत्र के माध्यम से ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की विवेचना थाना स्तर से हटाकर क्षेत्राधिकारी भीटी को सौंपी जाए, ताकि सभी आरोपों, घटनास्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष पड़ताल हो सके। इस संबंध में पंकज निषाद, सुरेश निषाद, नंदनी, तारा, काजल, लाजू, राहुल और लहूरी सहित अन्य ग्रामीणों ने भी अपनी मांग उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि कार में आग लगाने की घटना में किसकी भूमिका थी और किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई के पर्याप्त आधार हैं। फिलहाल, ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष विवेचना कराने और कथित प्रताड़ना से राहत दिलाने की गुहार लगाई है।




