कटेहरी के बीबीपुर रंडौली में सुबह फोटो खिंचवाकर मजदूरों के लौटने का दावा, मौके पर 7-8 लोगों के ही काम करने की बात आई सामने
प्रमोद कुमार वर्मा
अम्बेडकरनगर (अवधी खबर)।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद सरकारी योजनाओं में अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। जिले के प्रभारी मंत्री एवं पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के लगातार भ्रमण और जनसुनवाई के बीच कटेहरी विकासखंड की ग्राम पंचायत बीबीपुर रंडौली स्थित अमृत सरोवर में बीवी जी रामजी (मनरेगा) के तहत कराए जा रहे कार्यों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि मौके पर वास्तविक मजदूरों की संख्या कम होने के बावजूद ऑनलाइन हाजिरी में प्रतिदिन 50 से अधिक श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत में अमृत सरोवर की खुदाई का कार्य करीब तीन सप्ताह से चल रहा है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी और मीडिया की पड़ताल में दावा किया गया कि कार्यस्थल पर प्रतिदिन लगभग 20 से 25 या इससे भी कम मजदूर ही पहुंचते हैं। आरोप है कि सुबह के समय मजदूरों की तस्वीरें खींचकर ऑनलाइन हाजिरी अपलोड की जाती है, जिसके बाद अधिकांश लोग घर लौट जाते हैं। मौके पर केवल सात से आठ मजदूरों के ही दिनभर काम करने की बात सामने आई है।
मीडिया पड़ताल के दौरान कथित तौर पर खुफिया कैमरे में दर्ज बातचीत में एक व्यक्ति ने बताया कि पिछले करीब तीन सप्ताह से काम चल रहा है। सुबह काफी लोग आते हैं, फोटो खिंचवाने के बाद चले जाते हैं, जबकि सात से आठ लोग ही सुबह से शाम तक काम करते हैं।
मामले में एक और सवाल ऑनलाइन हाजिरी की समयावधि को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि कटेहरी विकासखंड की अन्य ग्राम पंचायतों में मनरेगा की ऑनलाइन उपस्थिति उसी दिन पोर्टल पर दिखाई देने लगती है, जबकि बीबीपुर रंडौली की हाजिरी अगले दिन प्रदर्शित होने की बात कही जा रही है। इस अंतर के पीछे क्या तकनीकी या प्रशासनिक कारण है, इसकी जांच जरूरी है। साथ ही, पोर्टल पर दर्ज श्रमिकों की संख्या, कार्यस्थल की तस्वीरों और वास्तविक उपस्थिति का मिलान किए जाने की आवश्यकता है।
ग्राम पंचायत में इससे पहले भी तालाब की खुदाई को लेकर सवाल उठने की बात सामने आई थी। पूर्व में आरोप था कि ग्राम प्रधान के स्तर से जेसीबी के जरिए मिट्टी निकलवाकर तालाब की खुदाई कराई जा रही थी और मिट्टी बेच दी गई। अब उसी अमृत सरोवर में निर्माण कार्य के दौरान कथित फर्जी हाजिरी का मामला सामने आने से पंचायत स्तर पर कराए जा रहे कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले में ग्राम पंचायत स्तर से लेकर बीवी जी रामजी (मनरेगा) सेल तक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, ग्राम प्रधान या संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत अभी जांच का विषय है। प्रशासन को मौके पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन कराने, मस्टर रोल और ऑनलाइन हाजिरी का मिलान करने, श्रमिकों के बयान लेने तथा कार्य की माप और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच कराने की जरूरत है।
एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे आरोप सरकारी व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करते हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को संज्ञान में लेकर निष्पक्ष जांच कराता है या फिर अमृत सरोवर में कथित अनियमितताओं का यह मामला भी फाइलों तक ही सीमित रह जाता है।
वही जब इस संबंध में एपीओ कटेहरी आरिफ से वार्ता की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि मामले को दिखाते हैं।
वही जब इस संबंध में डीसी मनरेगा अनूप सिंह से वार्ता करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा पाया।
मुख्य विकास अधिकारी से टेलिफोनिक वार्ता करने पर छुट्टी पर होने की वजह से उनसे वार्ता नहीं हो पाई डीडीओ सविता सिंह के द्वारा बताया गया आपके माध्यम से जानकारी मिली है मामले की जांच कर कार्रवाई करावाती हूं।




