फर्जी अंकपत्र के सहारे बनी कोटेदार, जिलाधिकारी से कार्यवाही की मांग

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अवधी खबर संवाददाता

अंबेडकरनगर।
ग्राम सभा बनगाँव में कोटेदार पद को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रतिमा सिंह पत्नी इन्द्रसेन सिंह और अखिलेश सिंह पुत्र इन्द्रसेन सिंह पर आरोप है कि इन्होंने फर्जी हाईस्कूल अंकपत्र के सहारे कोटेदार का पद हासिल किया है। ग्रामीणों में इस खुलासे के बाद गहरा आक्रोश है और जिलाधिकारी से सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

फर्जी अंकपत्र बना सरकारी कोटे में सेंध का रास्ता

शिकायतकर्ता शैलेन्द्र कुमार पुत्र स्व. हौसिला प्रसाद ने जिलाधिकारी को भेजे शिकायती पत्र में बताया कि वर्ष 2018 का जो हाईस्कूल प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया गया है, वह झारखंड ओपन स्कूल से जारी दर्शाया गया है। लेकिन जांच में स्पष्ट हो गया है कि झारखंड में ऐसी कोई मान्यता प्राप्त संस्था कभी अस्तित्व में रही ही नहीं।

फर्जी वेबसाइट, फर्जी दस्तावेज, और फर्जी पात्रता

सूत्रों के मुताबिक उक्त कथित संस्था को एक फर्जी वेबसाइट और सर्टिफिकेट निर्माण गिरोह द्वारा चलाया गया था। गंभीर बात यह है कि प्रतिमा सिंह और अखिलेश सिंह की भूमिका खुद इस जालसाजी में संदिग्ध मानी जा रही है।

सरकार को गुमराह कर कब्जा जमाया कोटे पर

शिकायत में कहा गया है कि प्रतिमा सिंह को कोटेदार पद हेतु न तो शैक्षिक योग्यता प्राप्त थी और न ही पात्रता, इसके बावजूद उन्होंने कूट रचित दस्तावेज प्रस्तुत कर शासन को धोखे में रखते हुए सरकारी योजना के वितरण जैसे संवेदनशील पद पर कब्जा कर लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही किया था आगाह

शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश (SLP No. 10546/2020) का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट पहले ही ऐसे फर्जी अंकपत्रों के जाल को लेकर सख्त टिप्पणी कर चुका है। अदालत ने कहा था कि इस प्रकार के दस्तावेजों की तत्काल जांच और विधिक कार्यवाही आवश्यक है, वरना यह प्रवृत्ति व्यवस्था को खोखला कर देगी।

अब तक प्रशासन चुप, नहीं हुई कोई जांच

ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में कई बार शिकायत देने के बावजूद न कोई जांच बैठाई गई, न ही कोई सत्यापन कराया गया। प्रशासन की चुप्पी से ग्रामीणों का भरोसा डगमगाने लगा है।

जनता की माँग: हो एफआईआर, पद से हटे कोटेदार

गांव के लोगों ने अब एकजुट होकर कोटेदार के पद से तत्काल बर्खास्तगी और एफआईआर दर्ज करने की माँग की है। साथ ही उन्होंने झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) से प्रमाणपत्र की स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई है।अब देखना ये है कि प्रशासन इस फर्जीवाड़े पर कब तक मौन बैठा रहता है या वास्तव में कोई कठोर कदम उठाता है।
यदि ऐसा नहीं हुआ, तो यह सिर्फ बनगाँव ही नहीं, पूरे जनपद की जनवितरण प्रणाली पर सवाल खड़े कर देगा।


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