महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी ई-रिक्शा चालक रागिनी

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अंबेडकरनगर। तहसील टाण्डा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत वल्लीपुर निकट (बरियावन) की रहने वाली रागिनी (35) के पति का पैरालिसिस होने के बाद घर की आर्थिक जिम्मेदारियाँ उठाकर महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का सुनहरा उदाहरण पेश किया है।

पति रामदीन अब चल फिर नहीं पा रहें हैं, फिर भी रागिनी ने हिम्मत नहीं हारी और ई-रिक्शा चलाने का साहसिक निर्णय लिया। जनपद वासियों का मानना है कि रागिनी की कहानी हमारे समाज में महिलाओं के प्रति बदलाव लाने का संदेश देती है।

प्रतिदिन तकरीबन 300 से 400 रुपये कमाकर वह अपने परिवार का एकमात्र सहारा बन गई हैं। रागिनी के दो बच्चे एक बेटी लगभग 6 वर्ष व बेटा 5 वर्ष का हैं, पढ़ाई-लिखाई के साथ पति व सास का भी पूरा ख्याल रखती हैं। रागिनी कहती हैं जब पति बीमारी के कारण बिस्तर पर पड़े थे।

तब लगा कि कुछ करना होगा ई-रिक्शा चलाना शुरू किया तो सड़क पर मुस्कानें लौट आई यात्रियों का प्यार मिला और आत्मविश्वास बढ़ा। स्थानीय समाजसेवी बताते हैं कि रागिनी ने अपनी मेहनत और लगन से परिवार को आत्मनिर्भर बनाया है।

यह सिर्फ कमाई का मामला नहीं बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने और समाज में महिलाओं की स्थिति मजबूत करने का प्रेरक उदाहरण भी है।

रागिनी ने साबित कर दिया कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों महिला हौसला रखें तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। हमें भी सोच बदलकर महिलाओं को पूरा सहयोग देना चाहिए। जिससे वह तरक्की कर सकें।


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