वल्लीपुर में मनरेगा कार्यों पर फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप

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अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकर नगर।
जनपद के विकास खंड भियांव अंतर्गत ग्राम सभा वल्लीपुर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितता और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए फोटो और दस्तावेजों के आधार पर यह मामला जिले के सबसे बड़े कथित मनरेगा घोटालों में से एक माना जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि जहां जिले के अन्य ग्राम सभाओं में खेतों में हरियाली नजर आ रही है, वहीं वल्लीपुर में दूर-दूर तक खेतों की जुताई दर्शाई जा रही है। तस्वीरों से यह प्रतीत होता है कि जुताई के समय खेत गीले थे, जो बरसात के मौसम और धान की रोपाई की तैयारी का समय दर्शाता है। जबकि वर्तमान समय में ऐसी स्थिति स्वाभाविक नहीं मानी जा रही।

कुछ तस्वीरों में छोटे फसल के पौधे भी दिखाई दे रहे हैं, जिनके बारे में ग्रामीणों का कहना है कि वे मौजूदा मौसम से मेल नहीं खाते। इतना ही नहीं, मजदूरों को पसीने से लथपथ दिखाया गया है, जबकि इस समय तापमान और मौसम की स्थिति ऐसी नहीं है कि मजदूरों के अत्यधिक पसीने की संभावना हो। अन्य ग्राम सभाओं में चल रहे कार्यों की तस्वीरों से तुलना करने पर भी यह अंतर स्पष्ट बताया जा रहा है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि एक ही फोटो को एक सप्ताह से लगातार वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है। नियमानुसार, एक कार्य की फोटो एक ही बार अपलोड की जा सकती है, लेकिन यहां बार-बार एक जैसी तस्वीरें अपलोड होना संभावित फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है। ग्रामीणों का दावा है कि जब भी इस संबंध में समाचार प्रकाशित होते हैं, कुछ समय के लिए गतिविधि रुक जाती है, लेकिन बाद में पुनः वही क्रम शुरू हो जाता है।

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि वल्लीपुर ग्राम सभा में मनरेगा पोर्टल पर पिछले 8–9 महीनों में अपलोड की गई सभी तस्वीरों और मास्टर रोल की तकनीकी जांच कराई जाए। यदि स्वतंत्र एजेंसी या जिला स्तरीय टीम से जांच हो जाए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

ज्ञात हो कि हाल ही में जिलाधिकारी द्वारा जनपद की दो ग्राम सभाओं के प्रधानों के वित्तीय अधिकार सीज किए गए हैं, जिससे प्रशासन की सख्ती का संकेत मिला है। ऐसे में अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी पर टिकी हैं कि वल्लीपुर प्रकरण में क्या कार्रवाई होती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला जिले में मनरेगा की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर सकता है।

मनरेगा जैसी 100 दिन रोजगार गारंटी योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि कार्य केवल कागजों और फोटो तक सीमित रह जाएं तो यह योजना की मूल भावना के साथ अन्याय होगा।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करता है या नहीं। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने की मांग की है, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके और वास्तविक जरूरतमंदों को योजना का लाभ मिल सके।


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