अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर।
महरुआ थाना क्षेत्र के ग्राम अतरौरा में मारपीट और तोड़फोड़ के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। आरोप है कि पुलिस ने पहले एक पक्ष की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया, जबकि दूसरे पक्ष की तहरीर पर तीन दिन बाद मुकदमा दर्ज किया गया। इसको लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम अतरौरा निवासी सोनू कुमार पुत्र हीरालाल ने थाना महरुआ में तहरीर देकर आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी ग्राम सभा के प्रधान के खिलाफ जिलाधिकारी को शिकायती पत्र दिया था, जिसकी जांच 1 मार्च 2026 को की गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच के दौरान विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं सामने आई थीं।
बताया जाता है कि इसी बात से नाराज होकर 3 मार्च 2026 को लगभग दोपहर 12:30 बजे पवन कुमार पुत्र शीतला प्रसाद रोजगार सेवक, अतरौरा कथित रूप से सोनू कुमार की दुकान पर पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए मारपीट करने लगे। विरोध करने पर उन्होंने शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया।
पीड़ित का आरोप है कि इसी दौरान अहेम यादव, शीतला प्रसाद और अनुराग कश्यप निवासी ग्राम अतरौरा भी वहां पहुंच गए और मारपीट करने लगे। साथ ही दुकान का सामान भी तोड़फोड़ कर दिया गया। आरोप है कि जाते समय विपक्षियों ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी भी दी।
घटना के बाद पुलिस ने एक पक्ष की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया, लेकिन दूसरे पक्ष की तहरीर पर तीन दिन बाद मुकदमा दर्ज किए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि पुलिस को दोनों पक्षों की शिकायतों पर निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए थी।




