जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं ध्वस्त, समय से पहले लटका ताला, ब्लीडिंग से तड़पती रही गर्भवती महिला, निजी केंद्र ले जाने को मजबूर परिजन

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जिम्मेदारी से भागे अधिकारी! सवाल पूछने पर सीएमओ ने काटा मीडिया का फोन

अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकरनगर (प्रमोद वर्मा)।
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री व उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक द्वारा हाल ही में मुख्य चिकित्सा अधिकारी व डिप्टी सीएमओ के खिलाफ जांच के आदेश दिए जाने के बाद भी जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो रहा है। शुक्रवार को मीडिया की पड़ताल में अस्पताल की बड़ी लापरवाही उजागर हुई, जहां ड्यूटी का समय समाप्त होने से पहले ही चिकित्सक और स्टाफ अपने कक्षों से नदारद मिले। इस दौरान गंभीर हालत में पहुंची एक गर्भवती महिला इलाज और जांच के लिए तड़पती रही, जिसे अंततः निजी केंद्र की शरण लेनी पड़ी।

समय से पहले बंद मिला अल्ट्रासाउंड कक्ष

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुल्तानपुर जनपद के बौरा जगदीशपुर की निवासी दुर्गेश कुमारी पत्नी सुभाष बोरा गर्भवती थीं। गर्भ में ही शिशु की मौत हो जाने के कारण महिला गंभीर हालत में थी और उसे अत्यधिक ब्लीडिंग हो रही थी। महरुआ थाना क्षेत्र स्थित अपने रिश्तेदार के घर आई महिला को उसके पति व रिश्तेदार एम्बुलेंस के जरिए जिला अस्पताल अम्बेडकरनगर की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे।


इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार के बाद ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। परिजन जब स्ट्रेचर पर महिला को लेकर अल्ट्रासाउंड कक्ष पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। दोपहर करीब 1:50 बजे मीडिया टीम को पीड़ित परिवार अस्पताल परिसर में भटकता हुआ मिला। परिजनों ने बताया कि वे करीब 20 मिनट से वहां खड़े हैं, लेकिन कोई भी जिम्मेदार चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं है। अस्पताल कर्मियों द्वारा उन्हें अगले दिन आने की बात कही गई, या फिर बाहर किसी निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने की सलाह दी गई।जिसके बाद मजबूरन परिजन महिला को निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र ले गए।

सटे हैं कार्यालय, फिर भी समन्वय का अभाव

हैरानी की बात यह है कि जिला अस्पताल परिसर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कार्यालय एक-दूसरे से बिल्कुल सटे हुए हैं। इसके बावजूद अस्पताल की ओपीडी और जांच सेवाओं पर प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। करोड़ों रुपये का वार्षिक बजट होने के बाद भी इमरजेंसी सेवाओं के समय मरीजों को इस तरह की घोर लापरवाही का सामना करना पड़ रहा है।

अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला

इस पूरे प्रकरण को लेकर जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय सैवाल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले की जिम्मेदारी जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) पर डालते हुए फोन काट दिया। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा एक-दूसरे पर पल्ला झाड़े जाने के रवैये से स्थानीय नागरिकों और मरीजों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिला मुख्यालय के मुख्य अस्पताल का यह हाल है, तो ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। मुझे जब इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पीएम यादव से बात किया गया तो उनके द्वारा बताया गया कि हमारी जानकारी में ऐसा कोई मामला नहीं है।


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