तत्काल कार्यमुक्ति के निर्देश के बावजूद नहीं हुआ अनुपालन, अंदरखाने ‘मैनेजमेंट’ की चर्चाएं तेज

बस्ती। नगर पंचायत भानपुर की अधिशासी अधिकारी रिचा सिंह के स्थानांतरण के बाद भी कार्यमुक्ति न होने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। नगर निकाय निदेशालय, उत्तर प्रदेश द्वारा जारी आदेश में उन्हें जनहित एवं शासकीय कार्यहित में तत्काल प्रभाव से नगर पंचायत बढ़नीचाफा में तैनात किया गया है। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने वर्तमान तैनाती स्थल से कार्यमुक्त होकर नए पद पर शीघ्र कार्यभार ग्रहण करें।
इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। सूत्रों की मानें तो आदेश जारी होने के बाद भी कार्यमुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
नगर पंचायत भानपुर में बीते कुछ समय से विकास कार्यों, वित्तीय प्रक्रियाओं और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं चलती रही हैं। ऐसे में अचानक हुए इस स्थानांतरण को कई लोग सामान्य प्रक्रिया से हटकर देख रहे हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे नियमित प्रशासनिक निर्णय बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शासन द्वारा तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण का आदेश दिया गया है, तो उसका अनुपालन भी उसी तत्परता से होना चाहिए।
कुछ लोगों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि “जब छोटे कर्मचारियों से तत्काल आदेश पालन की अपेक्षा की जाती है, तो अधिकारियों के मामले में ढिलाई क्यों?”
वहीं, एक अन्य स्थानीय नागरिक का कहना है कि “दो नगर पंचायतों का प्रभार होने की वजह से शायद स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है, लेकिन आदेश का पालन तो हर हाल में होना चाहिए।”
गौरतलब है कि नगर निकाय निदेशालय के आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि स्थानांतरण आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि आदेश की अवहेलना को अनुशासनहीनता माना जाएगा और संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है।
इसके बावजूद अब तक नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण न किए जाने की स्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय स्तर पर इस मामले में अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे स्थिति और पेचीदा होती जा रही है।
फिलहाल इस पूरे प्रकरण पर प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाता है और शासन के आदेशों का अनुपालन कब तक सुनिश्चित किया जाता है।




