अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। हंसवर थाना क्षेत्र के निवासी हरिश्चन्द्र पुत्र रूद्र प्रसाद ने बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा हंसवर के तत्कालीन अधिकारियों और एक पक्षकार पर कूटरचित एग्रीमेंट तैयार कर बैंक परिसर की भूमि से जुड़े अभिलेखों में हेराफेरी करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने पुलिस अधीक्षक को रजिस्टर्ड डाक से शिकायती पत्र भेजकर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 1970 में गाटा संख्या 772क की भूमि विश्वनाथ, हरिश्चन्द्र एवं सन्तराम पुत्रगण रूद्र प्रसाद के नाम रजिस्टर्ड बैनामे से खरीदी गई थी। वर्ष 1980 में इसी भूमि पर बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा हंसवर की स्थापना हुई और बैंक भवन का निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुरूप कराया गया।हरिश्चन्द्र का आरोप है कि 17 अप्रैल 1984 को बैंक और विश्वनाथ प्रसाद सोनी के बीच हुए रजिस्टर्ड एग्रीमेंट में गाटा संख्या का उल्लेख नहीं किया गया तथा चौहद्दी भी गलत दर्ज की गई।
इसके बाद 1987, 1999, 2010 और 2018 में किए गए एग्रीमेंटों में भी गाटा संख्या का उल्लेख नहीं किया गया और कथित रूप से मनगढ़ंत चौहद्दी दर्शाकर वास्तविक स्थिति को बदलने का प्रयास किया गया।शिकायतकर्ता का कहना है कि वर्ष 1986 में बैंक के विधि सलाहकार की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बैंक परिसर गाटा संख्या 772क पर संचालित होना दर्ज था, लेकिन बाद के दस्तावेजों में गाटा संख्या 768 अथवा अन्य विवरण दर्शाकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए।
आरोप है कि वर्ष 2018 के एग्रीमेंट में फर्जी चौहद्दी दर्शाते हुए आसपास के कई मकानों और प्लॉटों को भी प्रभावित किया गया।हरिश्चन्द्र ने आरोप लगाया कि उनके पिता रूद्र प्रसाद की मृत्यु के बाद भूमि तीनों भाइयों के नाम दर्ज होने के बावजूद विश्वनाथ प्रसाद सोनी ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक से मिलीभगत कर अकेले एग्रीमेंट करा लिया, जिससे स्वयं लाभ लेने का प्रयास किया गया।पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित बैंक अधिकारियों एवं अन्य आरोपितों के विरुद्ध कूटरचना, धोखाधड़ी और अन्य प्रासंगिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।



