28 मार्च को बी0एन0के0बी0 पी0जी0 कॉलेज में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का होगा आयोजन

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अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकरनगर। जनपद मुख्यालय अकबरपुर स्थित बी0एन0के0बी0पी0जी0 कॉलेज अकबरपुर डॉ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या से सम्बद्ध अम्बेडकरनगर जिले का लब्ध प्रतिष्ठित वित्तपोषित महाविद्यालय है। जो महाविद्यालय उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान लखनऊ (संस्कृति विभाग यूपी शासन) के संयुक्त तत्त्वावधान में 28 मार्च 2025 को जैन साहित्य परम्परा में ऋषभदेव एवं राम विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है। इस आयोजन में देश भर से लगभग 200 से ज्यादा शोधार्थियों विद्वानों और नगर के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति होंगी। उदघाटन समारोह की मुख्य अतिथि पं. दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर की कुलपति प्रो. पूनम टंडन होंगी वहीं विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सदस्य और पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष उत्तर-प्रदेश भाषा संस्थान प्रो. राजनारायण शुक्ल होंगे। इस सत्र के अध्यक्ष हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयागराज के सभापति और पूर्व अध्यक्ष हिंदी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित और बीज वक्ता प्रो.पवन अग्रवाल, सभापति, भारतीय हिंदी परिषद् प्रयागराज होंगे। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. शुचिता पाण्डेय ने इस आयोजन के बारे कहा कि जैन साहित्य परंपरा में ऋषभदेव और राम जैसे महान पात्रों पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी की सार्थकता बहुआयामी है, यह न केवल जैन धर्म के साहित्यिक और दार्शनिक योगदान को उजागर करेगी। बल्कि भारतीय संस्कृति और इतिहास के व्यापक संदर्भ में भी इन व्यक्तित्वों की प्रासंगिकता को रेखांकित करेगी।

ऋषभदेव और राम दोनों ही भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं, जो जैन और वैदिक परंपराओं में समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।संगोष्ठी इन दोनों परंपराओं के बीच संवाद को बढ़ावा देगी जिससे विभिन्न धार्मिक दृष्टिकोणों के बीच समानता और अंतर को समझने का अवसर मिल सके। यह सांस्कृतिक एकता और विविधता की समझने में सहायक होगा।आयोजन में सहयोगी उत्तर प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग की इकाई यूपी जैन विद्या शोध संस्थान, लखनऊ के निदेशक अमित कुमार अग्निहोत्री ने कहा कि जैन साहित्य, जो प्राकृत, संस्कृत और अपभ्रंश जैसी भाषाओं में लिखा गया हैं।भारतीय भाषाओं और साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। संगोष्ठी के जरिए इस साहित्य की गहराई, काव्य शैली और दार्शनिक विचारों का विश्लेषण होगा, जो शोधकर्ताओं और विद्वानों के लिए नई दिशाएं खोलेगा। आज के संदर्भ में ऋषभदेव की कर्मठता और राम की अहिंसक मर्यादा जैसे मूल्य व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं। संगोष्ठी इन मूल्यों को पुनर्जनन और प्रचारित करने का मंच प्रदान करेगी जो समकालीन चुनौतियों के समाधान में उपयोगी बन सके। आयोजन सचिव डॉ0 शशांक मिश्र ने बताया कि यह राष्ट्रीय संगोष्ठी उद्घाटन- समापन समेत तीनों सत्रों में संपन्न होगी।

आगे कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित यह संगोष्ठी विद्वानों, शोधकर्ताओं और छात्रों को एक मंच पर लाएगी,जहां विचारों का आदान-प्रदान, नए शोध-दिशाओं का विकास और जैन साहित्य के अप्रकाशित पहलुओं पर प्रकाश डाला जा सकेगा। यह ज्ञान के संरक्षण और प्रसार में भी योगदान देगी। ‘जैन साहित्य परंपरा में ऋषभदेव एवं राम विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी केवल एक धार्मिक या साहित्यिक आयोजन नहीं है। बल्कि यह एक बौद्धिक और सांस्कृतिक उत्सव है, जो अतीत को वर्तमान से जोड़ता है और भविष्य के लिए प्रेरणा प्रदान करेगा। यह जैन परंपरा की समृद्ध विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ भारतीय साहित्य और संस्कृति के व्यापक अध्ययन को प्रोत्साहित करेगी। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-प्रदेश के अनेक हिस्सों से विद्वान और शोधार्थी भाग ले रहे हैं। प्रमुख विद्वानों में प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित सभापति हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयागराज, प्रो. अभय जैन, उपाध्यक्ष, यूपी जैन विद्या शोध संस्थान लखनऊ, प्रो. शैलेंद्र नाथ मिश्र, अध्यक्ष हिंदी विभाग, लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय गोंडा, प्रो. राजशरण शाही, शिक्षाशास्त्र, बी0बी0ए0यू0 लखनऊ/राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद्, प्रो. श्रुति, हिंदी तथा आधुनिक भारतीय भाषा विभाग लखनऊ विश्वविद्यालय, प्रो. परेश पांडेय प्राचार्य बाबा बरुआ दास स्नातकोत्तर महाविद्यालय परुइय्या आश्रम,अम्बेडकरनगर , प्रो. हरीश कुमार शर्मा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर, प्रो. संजय जैन, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज दौसा राजस्थान, प्रो. श्रुति हिंदी तथा आधुनिक भारतीय भाषा विभाग लखनऊ विश्वविद्यालय, प्रो. अनुराग मिश्र, हिंदी. के.एस. साकेत पी.जी. कॉलेज अयोध्या, प्रो. ममता मणि त्रिपाठी, प्राचार्य, उदित नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पडरौना, डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव, बी.बी.ए.यू. लखनऊ, डॉ0 आनंद जैन, सहायक आचार्य जैन-बौद्ध दर्शन विभाग बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी, डॉ0 नेहा जैन सहायक आचार्य समाजशास्त्र प.दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय, राजाजीपुरम लखनऊ, सहित अन्य लोगों ने अपनी सहमति प्रदान की है।महाविद्यालय का शिक्षक परिवार और प्रबंध-समिति राष्ट्रीय संगोष्ठी की सफलता और सार्थकता के लिए निरंतर तैयारियों में जुटी है।

अकादमिक रूप से यह आयोजन जिले के शिक्षा जगत के लिए महत्ववपूर्ण आयोजन है। आयोजन-समिति ने जिले के प्रबुद्ध-गणमान्य नागरिकों और शैक्षिक जगत से जुड़े लोगों से सहभागिता की अपील की है। उक्त कार्यक्रम की जानकारी डॉ0 शशांक मिश्र मीडिया संयोजक बी0एन0के0बी0पी0जी0 कॉलेज अकबरपुर ने दिया।


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