अंबेडकरनगर के टांडा विकासखंड में भ्रष्टाचार की खुली बानगी
अवधी खबर संवाददाता
अंबेडकरनगर।
प्रदेश और केंद्र सरकारें भले ही भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देख रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जनपद अंबेडकरनगर के विकास खंड टांडा की ग्राम सभाएं माझा उल्टहवा और त्रिलोकपुर मनरेगा योजना में भारी अनियमितताओं का अड्डा बनती जा रही हैं।

स्थानीय जांच और ग्रामीणों के बयान के अनुसार, मनरेगा कार्यों में एक ही फोटो को बार-बार इस्तेमाल कर कई मास्टर रोल्स पर फर्जी उपस्थिति दर्शाई जा रही है। यह सिलसिला केवल एक या दो दिन का नहीं, बल्कि लगातार कई दिनों से जारी है।

एक ही फोटो अलग अलग मास्टर रोल में…….

फोटो एक, नाम अलग-अलग — खुलेआम फर्जी हाजिरी का खेल
सूत्रों की मानें तो मनरेगा पोर्टल पर अपलोड किए गए मास्टर रोल्स में या तो एक ही व्यक्ति की फोटो बार-बार दिखाई दे रही है या फिर एक ही व्यक्ति के अलग-अलग फोटो के साथ अलग-अलग नामों की हाजिरी दर्शाई जा रही है। जबकि नियमों के अनुसार, जो व्यक्ति कार्य करता है, उसी का फोटो उसी दिन के मास्टर रोल पर अपलोड होना चाहिए।
बारिश में भी कागज़ों पर काम, जमीन पर सन्नाटा
ग्राम सभा त्रिलोकपुर में आज की तिथि में 49 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज है, लेकिन स्थानीय लोगों से फोन पर संपर्क करने पर जानकारी मिली कि गांव में तेज बारिश हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब बारिश हो रही है तो कार्य कैसे चल रहा है? और अगर कार्य हो रहा है, तो फोटो में कहीं भी बारिश के निशान क्यों नहीं हैं?
इसी प्रकार माझा उल्टहवा में भी यह खेल लंबे समय से चल रहा है, जहां प्रतिदिन 60 के आसपास मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जाती है।
कई बार एक ही व्यक्ति के अलग-अलग फोटो मास्टर रोल पर अपलोड कर दिए जाते हैं। जब ग्राम पंचायत सचिव अखण्ड प्रताप वर्मा और मनोज यादव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनका मोबाइल फोन बंद मिला। व्हाट्सएप के माध्यम से सूचना देने के बाद भी कोई उत्तर नहीं मिला। सूत्रों के अनुसार, इन सचिवों ने प्रधान जी के व्हाट्सएप ग्रुप में सूचना जरूर साझा की, लेकिन इसके बावजूद मनरेगा का कार्य निर्बाध रूप से चलता रहा।
क्या मनरेगा बन रहा है चुनावी फंडिंग का जरिया?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब खेल वर्तमान ग्राम प्रधानों की शह पर हो रहा है, जो आने वाले पंचायत चुनावों के लिए मनरेगा फंड को राजनीतिक फायदे के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं।
प्रशासन से जांच की मांग
यह मामला सिर्फ दो ग्राम सभाओं तक सीमित नहीं हो सकता। यदि इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो मनरेगा योजना में व्यापक भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है। ज़रूरत है कि विकास खंड टांडा के उच्च अधिकारी इस प्रकरण को संज्ञान में लें और दोषियों पर कठोर कार्रवाई करें, ताकि जनकल्याणकारी योजनाओं का दुरुपयोग रुक सके।





