बिना हेलमेट के पेट्रोल देने पर रोक, मगर अम्बेडकर नगर में आदेश की उड़ रही धज्जियां

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कर्मचारी बोले— ‘किसकी मजाल जो जांच करने आ जाए!’

ग्राम सभा कटया पहलवान के पेट्रोल पंप पर नियमों की खुली अवहेलना

अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकर नगर।
प्रदेश सरकार द्वारा जारी सख्त निर्देश के बावजूद अम्बेडकर नगर जनपद में सड़क सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। दोपहिया वाहन चालकों को बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं देने का आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित नजर आ रहा है।

मामला है नेवरी से बसखारी मार्ग पर स्थित ग्राम सभा कटया पहलवान का, जहां एक इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप पर सरकार के आदेशों का मजाक उड़ाया जा रहा है। यहाँ दोपहिया वाहन सवारों को बिना हेलमेट पेट्रोल धड़ल्ले से दिया जा रहा है, और कर्मचारी इस पर तनिक भी संकोच नहीं कर रहे। जब पेट्रोल पंप कर्मी से इस संबंध में सवाल किया गया कि अगर कोई अधिकारी या जांच टीम आ जाए, तो क्या कार्रवाई होगी, तो जवाब में उसने बेहद गैर-जिम्मेदाराना और प्रशासन को चुनौती देने वाला बयान दे डाला। कर्मचारी ने कहा—

किसकी मजाल जो यहां जांच करने आ जाए!

प्रशासनिक उदासीनता या मिलीभगत?

यह जवाब न सिर्फ सरकारी आदेशों का अपमान है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पेट्रोल पंप संचालकों को शासन-प्रशासन का कोई भय नहीं है। सवाल यह भी उठता है कि क्या जिला प्रशासन को इस तरह की लापरवाही की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी चुप्पी साधे बैठा है?

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने सभी जिलों में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं दिया जाए। इस नियम का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और हेलमेट की अनिवार्यता को लागू करना है। लेकिन यदि अम्बेडकर नगर जैसे जिलों में ही इस आदेश का पालन नहीं हो रहा, तो सरकार की मंशा पर भी प्रश्नचिह्न लगना लाजिमी है।

आमजन में बढ़ रहा असंतोष

स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों का पालन सिर्फ आम जनता के लिए ही होता है। जब प्रशासन की आंखों के सामने ही आदेशों की अनदेखी हो रही हो, तो आम नागरिकों से नियमों का पालन कैसे करवाया जाएगा?
एक स्थानीय निवासी ने नाराजगी जताते हुए कहा हेलमेट न पहनने पर ट्रैफिक पुलिस चालान काटती है, लेकिन पेट्रोल पंप पर खुलेआम बिना हेलमेट पेट्रोल मिल रहा है। यह दोहरा रवैया बंद होना चाहिए।

अब क्या लेगा प्रशासन संज्ञान क्या

इस तरह के मामलों से सरकार की साख पर भी सवाल उठते हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में स्वत: संज्ञान लेता है या फिर किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करता है? यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो यह आदेश भी अन्य कागजी निर्देशों की तरह फाइलों में धूल खाता रह जाएगा।


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