शिक्षामित्र केयर समिति द्वारा 154 बेटियों की शादी व 17 दिवंगत शिक्षामित्रों के आश्रितों का किया गया सहयोग

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शिक्षामित्रों के साथ सरकार द्वारा किया जा रहा है सौतेला व्यवहार, शिक्षामित्र आर्थिक तंगी से परेशान
सरकार द्वारा लम्बे समय से दिया जा रहा है झूठा आश्वासन गठित की जाती रही कमेटियां परिणाम शून्य


शिक्षक की सभी योग्यता रखने वाले शिक्षामित्र 24 वर्षो से प्राथमिक विद्यालयों में है नियुक्त, नियमित शिक्षकों के बराबर लिया जाता है काम

अम्बेडकर नगर। शिक्षामित्र केयर समिति अंबेडकर नगर के जिला संयोजक व शिक्षामित्र शिक्षक संघ अम्बेडकर नगर के जिलाध्यक्ष राम चन्दर मौर्य ने कहा कि शिक्षामित्र केयर समिति द्वारा अब तक 154 शिक्षामित्रों की बेटियों के शादी में सहयोग किया गया है। वहीं 17 दिवंगत शिक्षामित्रों के आश्रितों को शिक्षामित्र केयर समिति द्वारा सहयोग प्रदान किया जा चुका है।

जिलाध्यक्ष जिला संयोजक राम चन्दर मौर्य ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार द्वारा शिक्षामित्रों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। अल्प मानदेय में शिक्षामित्रों को अपना परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। शिक्षामित्रों द्वारा बेटियों के शादी के लिए सहयोग मांगना पड़ रहा है। सरकार द्वारा शिक्षामित्रों को लम्बे समय से मानदेय वृद्धि का झूठा आश्वासन दिया जाता रहा तथा समाधान के नाम पर दो कमेटियों का गठन किया गया अभी तक परिणाम शून्य ही रहा। फिर भी सरकार शिक्षामित्रों के साथ उदासीनता पूर्ण रवैया अपनाते हुए केवल झूठे आश्वासन देने का काम कर रही है।आठ वर्षों से शिक्षामित्रों के मानदेय में कोई वृद्धि नहीं किया गया। जबकि शिक्षामित्र 24 वर्षों से बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालयों में कार्यरत हैं तथा शिक्षक की सभी योग्यता पूर्ण करते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षामित्र के मामले को लेकर पूरी तरह से फेल रही है। कम मानदेय आर्थिक तंगी के चलते 10000 दस हजार से अधिक शिक्षामित्रों की मौत की जिम्मेदार उत्तर प्रदेश सरकार की शिक्षामित्रों के प्रति अपनाईं गई गलत नीतियां हैं। जनवरी माह में शिक्षामित्रों को सरकार द्वारा मात्र 5 हजार रुपए मानदेय दिया जा रहा है। जिससे शिक्षामित्रों को परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। सरकार द्वारा ऐसी स्थिति उत्पन्न कर शिक्षामित्रों को मरने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

जिला संयोजक, जिलाध्यक्ष राम चन्दर मौर्य ने कहा कि शिक्षामित्र चुप नहीं बैठेंगे अपने अधिकार के लिए संघर्ष करेंगे। पूर्व की सरकार द्वारा शिक्षामित्रों को 40 हजार रुपए वेतन मिल रहा था। वर्तमान सरकार द्वारा जनवरी व जून माह में 5 हजार रुपए मानदेय दिए जा रहा है। शेष माह का 10000 दस हजार रुपए मासिक मानदेय सरकार द्वारा दिए जा रहे हैं। वर्तमान महंगाई को देखते हुए जो बहुत ही कम है और वह भी जनपद के शिक्षामित्रों को समय से नहीं मिल पा रहा है। राम राज की परिकल्पना करने वाली व सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाली सरकार का दावा शिक्षामित्रों के साथ भेदभाव पूर्ण नीति के चलते झूठा साबित होता हुआ दिखाई दे रहा है।


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