अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर।
जनपद के अकबरपुर विकास खंड के सुलेमपुर गांव में अमृत सरोवर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी अमृत सरोवर का एक भी काम पूरा नहीं हो सका है। यहां दूषित पानी को अमृत सरोवर में जाने से रोकने तथा इसे निर्मल बनाए रखने की व्यवस्था नहीं है। और बंधा बनाने का काम भी पूरा नहीं है। अमृत सरोवर जलकुंभी से पटा है। तथा हर तरफ गंदगी है।

अमृत सरोवरों में वर्षा जल संचित कर भूगर्भ जलस्तर संवारने एवं गांव को जल संपदा में आत्मनिर्भर करने के लिए भारत सरकार ने गाइडलाइन जारी किया है। जिससे गर्मी के मौसम में पशु पक्षियों को पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके अमृत सरोवर में वर्षा जल को स्वच्छ कर भेजने, की भी ग्राम प्रधान द्वारा सुविधा नहीं की गई है अमृत सरोवर के आसपास सुंदरता बिखारने को लेकर दिशा निर्देश दिया गया है। यह सब आदेश -निर्देश सुलेमपुर अमृत सरोवर पर नहीं दिखता है।
निर्माण पर ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में 9 लाख 68 हजार 605 रुपए खर्च होना दिखाया गया है। यह भुगतान सिर्फ मजदूरी पर है। लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी यहां मिट्टी का कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। मौजूदा स्थित यह है कि अमृत सरोवर जलकुंभी से पटा गंदगी से कराह रहा है। केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना को जिम्मेदार पलीता लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसका क्षेत्रफल कितना है तथा इसकी लागत कितनी है और कब तक यह पूरा होगा इसका कोई सूचना बोर्ड आज तक यहां नहीं लगाया गया।
सुंदरी करण के नाम पर अमृतसरोवर पूरी तरह उजाड़ दिखता है। इसके निर्माण के नाम पर सिर्फ सरकारी धन का बंदर बांट किया जा रहा है। सरोवर निर्माण से पहले ही काफी गहरा था। ऐसे में इसके निर्माण पर कितना धन खर्च किया गया होगा यह देखकर सहज अनुमान लगाया जा सकता है। आज भी यहां सरोवर के चारों तरफ मिट्टी का बंधा बनाने, इंटरलॉकिंग वैरिकेडिंग, गेट, आउटलेट, इनलेट, लाइट, पौधे लगाने आदि कार्य होना है। ग्रामीणों को जल्द इसके सुंदरीकरण का बेसब्री से इंतजार है। विभागीय उदासीनता के चलते ग्रामीणों की आशा धूमिल दिख रही है।
प्रभारी डीसी मनरेगा अनिल कुमार सिंह ने बताया कि जानकारी मिली है विभागीय जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी


