बांध निर्माण के नाम पर मनरेगा में लाखों का खेल, जेई की मिलीभगत से हो रहा भ्रष्टाचार

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अस्ताबाद, उफ्राउली, रुकुनपुर कासिमपुर और पखारपुर ग्राम सभाओं में केवल खानापूर्ति, वेबसाइट पर फर्जी हाजिरी जारी

अवधी खबर संवाददाता

अंबेडकर नगर ( प्रमोद वर्मा)।
विकासखंड जलालपुर के कई ग्राम सभाओं में मनरेगा योजना के तहत चल रहे बांध निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बांध निर्माण के नाम पर सिर्फ घास की सफाई और ऊपरी मिट्टी की खुदाई की जा रही है, जबकि वास्तविक रूप से न तो कोई ऊंचाई बनी है और न ही बंधे का आकार दिख रहा है।


ग्राम सभाओं अस्ताबाद, उफ्राउली, रुकुनपुर कासिमपुर और पखारपुर में मनरेगा के तहत लाखों रुपये की धनराशि स्वीकृत है। मगर मौके पर जाकर देखने पर स्पष्ट हुआ कि जहां बांध निर्माण होना था, वहां सिर्फ 5-6 इंच की खुदाई कर दी गई है। कहीं मिट्टी भराई नहीं हुई, कहीं पुराने गड्ढे जस के तस पड़े हैं। ग्रामीणों ने बताया कि “यह सब सिर्फ कागज़ों पर दिखाने के लिए किया जा रहा है।


ग्राम पंचायत रूकुनपुर के सचिव ने फोन पर बातचीत में स्वीकार किया कि काम में गड़बड़ी है। उन्होंने कहा वास्तव में बांध निर्माण कार्य सिर्फ खानापूर्ति के तौर पर किया जा रहा है। मैंने जेई को बता दिया है कि भुगतान न किया जाए, लेकिन जेई साहब इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वहीं, ग्राम पंचायत अस्ताबाद के सचिव ने सफाई देते हुए कहा अभी केवल सफाई कार्य चल रहा है। लेखपाल की पैमाइश के बाद ही असली बांध निर्माण कार्य प्रारंभ होगा।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ग्राम पंचायत पखारपुर और अस्ताबाद में कार्य स्थल पर मजदूर मौजूद नहीं थे, फिर भी मनरेगा वेबसाइट पर हाजिरी जारी की जा रही है। ग्राम सभा उफ्राउली में जहाँ मौके पर सिर्फ 15 मजदूर कार्य करते मिले, वहीं वेबसाइट पर 34 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज है। इसी तरह रुकुनपुर कासिमपुर में भी मात्र कुछ मजदूर मिले, जबकि साइट पर 97 मजदूरों के नाम दर्ज किए गए हैं। सभी पंचायत सचिव के बयान और स्थानीय जांच से यह स्पष्ट होता है कि तकनीकी सहायक (जेई) की भूमिका संदिग्ध है।

सचिव द्वारा जानकारी देने के बावजूद न तो भुगतान रुका है और न ही निर्माण की स्थिति में सुधार हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा योजना का उद्देश्य गरीब मजदूरों को रोजगार देना है, लेकिन अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से यह योजना भ्रष्टाचार का जरिया बन गई है। ग्रामीणों को कहना जिलाधिकारी द्वारा सभी ग्राम सभाओं के कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।


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